नेता नहीं, एमपी-एमएलए बनना चाहते हैं लोग

mulayam singh yadavवाराणसी। काशी की पवित्र भूमि पर समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने लरजते शब्दों के साथ अपना दर्द रखा कि लोग अब उनके पास आते हैं एमपी या एमएलए का टिकट मांगने। कोई जन नेता नहीं बनना चाहता, लालबत्ती की चाहत ने आज समाजवादियों की विशिष्टता को समाप्त कर दिया है।

सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव रविवार को वाराणसी में थे। उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक सामाजिक संस्थान के बैनर तले यहां आयोजित विमर्श और हस्तक्षेप सार्थक पहल विषयक सम्मेलन व चुप्पेपुर पत्रकारपुरम के तय अपने दो कार्यक्रमों के दौरान सपा मुखिया अपना यह दर्द भी बांट गए कि आज के समाजवादी पसंद नहीं करते हैं छात्रों व युवा नेताओं को। उन्हें अब यह भय सताने लगा है कि कहीं यह नौजवान रेस में उन्हें पराजित न कर दें। यही वजह है कि नौजवानों का रूझान समाजवाद की ओर अपेक्षा से कम है, बहुत कम है।

यह इस बात की भी वजह है कि यूपी में आज युवाओं के सामने सत्य अथवा कर्म का कोई आदर्श नहीं है जिसके बताए रास्ते पर चलकर वह समाज निर्माण कर सकें। देश के वरिष्ठ राजनेता मुलायम सिंह ने इसे आदर्श स्थिति मानने से इन्कार करते हुए स्पष्ट कहा कि समाजवादियों को चिंतन करना होगा कि किस तरह नौजवानों को आगे लाएं जिससे राष्ट्र का विकास हो सके। डॉ. लोहिया व लोकनायक के बीच के प्रथम सार्थक संवाद का भावुक जिक्र करते हुए सपा मुखिया ने आज के राजनीतिक माहौल पर भी करारा प्रहार किया। नीति निर्माण व समय समय पर उसमें संशोधनों के प्रति उदासीनता को राजभाषा से जोड़ते हुए दुख जताया कि भारत ऐसा अकेला मुल्क है जिसकी अपनी कोई राजभाषा नहीं है। क्या हर्ज है कि अगर हिन्दी को बड़ी व उर्दू को छोटी बहन घोषित कर दिया जाए। क्या वजह है कि कल तक हमारा सबसे बड़ा मित्र श्रीलंका आज हमसे खफा है। तमिल समस्या हमारे सामने मुंह बाए खड़ी है और हम आंखें बंद किए पड़े हैं। अपने खासे लंबे संबोधन में मुलायम सिंह ने इस बात को संकेतों में कई बार कहा कि जनता के बीच नहीं रहोगे तो लालबत्ती भले जुटा लो, नेता नहीं बन पाओगे।

सम्मेलन में पद्मभूषण पं. साजन मिश्र ने सपा सुप्रीमो से काशी में कला केंद्र की स्थापना कराने का आग्रह किया, जिसे मुलायम ने सहर्ष स्वीकारा।

पंडित नेहरू व आडवाणी

बीते दिनों भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को लेकर दिए गए बयानों की चर्चा पर सपा मुखिया ने साफ किया कि अच्छे तो हैं ही आडवाणी जी, पं. जवाहर लाल नेहरू के राष्ट्रीय जज्बे को भी आप कैसे नजरअंदाज कर सकते हैं मगर इसका यह अर्थ क्यों निकाला जाता है कि समाजवादी पार्टी का भाजपा से कोई चुनावी रिश्ता होने जा रहा है। अरे भई, अच्छे लोगों के अच्छे कार्यो की प्रशंसा तो सभी को करनी चाहिए।

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