अब नेचुरल डाइ से रंगीन होगी जिंदगी

life-would-be-coloured-with-natural-dyeखड़गपुर। आपकी सेहत को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए पेड़-पौधों का प्रयोग कर नेचुरल डाइ तैयार हो गई है। मानव समाज को जहरीले रंगों के प्रभाव से बचाने के लिए यह कारनामा कर दिखाया है बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के विद्यासागर विश्वविद्यालय में वनस्पति विज्ञान व वानिकी के प्रोफेसर डॉ. अमल कुमार मंडल ने।

2008 से इस दिशा में शोध कर रहे डॉ. मंडल ने प्राकृतिक तौर पर लगभग 100 रंगों के डाइ तैयार करने में सफलता हासिल की है। बंगाल में मौजूद दुर्लभ प्रजाति के औषधीय गुणों वाले पौधों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए डॉ. मंडल कहते हैं कि सरकार यदि इस दिशा में सहयोग करते हुए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराती है तो व्यापक पैमाने पर नेचुरल डाइ तैयार की जा सकती है। देश-विदेश के विभिन्न बाजारों में इसकी मांग है। डॉ. मंडल 2012 में फेलो ऑफ इंडियन एसोसिएशन ऑफ एंजियोस्पर्म टेक्सोनॉमी (एफआइएएटी) व 2013 में लीनियन सोसाइटी ऑफ लंदन के नॉन मेंबर फेलो चयनित हुए।

डॉ. मंडल बताते हैं कि नेचुरल डाइ को विभिन्न प्रजाति के पेड़-पौधों की शाखाओं, पत्तियों, फूलों व छालों से तैयार किया जाता है। इसके लिए औषधीय गुणों वाले पौधों का सही चयन किया जाना आवश्यक है। नेचुरल डाइ का हम लंबे समय तक उपयोग कर सकते हैं। कपड़ों को रंगने अथवा कलाकृतियां बनाने में इसका उपयोग कर सकते हैं। खाद्य पदार्थो में भी इनके सुरक्षित उपयोग पर शोध हुए हैं। इनके प्रयोग से रंगों से होने वाले प्रदूषण को भी रोका जा सकता है।

ऐसे मिलते हैं रंग :-

लाल : तरल लाल रंग के लिए 200 ग्राम कृष्णचूड़ा फूल को एक लीटर जल में रात में भिगोकर दूसरे दिन उसका पेस्ट बनाकर उपयोग कर सकते हैं। धातकी फूल को सुखाकर उसका चूर्ण तैयार कर एक लीटर पानी में मिलाकर लाल रंग तैयार किया जा सकता है।

केसरिया : लगभग 500 ग्राम पलाश फूल को 10 लीटर पानी में सारी रात भिगोने पर केसरिया रंग प्राप्त होगा। सिउली फूल को सुखाने के बाद जल में उबालने पर भी केसरिया रंग तैयार होगा।

नारंगी : विक्सा अथवा सिंदूर पेड़ से प्राप्त फल के बीज का गूदा भिगोकर नारंगी रंग की डाइ तैयार की जा सकती है।

बादामी : कत्थे को पानी में रात भर भिगोने पर बादामी रंग मिलता है।

पीला : गेंदे के फूलों को सुखाकर चूर्ण बनाने के बाद पानी में मिलाकर पीले रंग का पेस्ट तैयार किया जा सकता है।

नीला रंग : अपराजिता फूलों की पंखुड़ियों को सुखाकर चूर्ण बनाने के बाद उसे पानी में मिलाकर नीले रंग तैयार करते हैं।

काला : आंवला के फल को काटकर सुखाने के बाद लोहे के बर्तन में पानी में खौलाकर अथवा सारी रात उसे पानी में भिगोने के बाद काला रंग प्राप्त किया जा सकता है।

हरा : कुंदरू, सेम या बरबटी के पौधों के पत्तों को पीसने पर हरा रंग प्राप्त होगा।

error: Content is protected !!