कोलकाता। भारत समेत बांग्लादेश और म्यांमार में चक्रवाती तूफान महासेन का खतरा मंडरा रहा है। इसकी आशंका को देखते हुए बांग्लादेश के तटीय इलाकों से लाखों लोगों को हटाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। करीब दस लाख से ज्यादा लोग इस तूफान के डर से अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तरफ पलायन कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के मुताबिक तूफान थोड़ा कमजोर जरूर पड़ा है लेकिन बांग्लादेश, म्यांमार और पूर्वोत्तर भारत के 82 लाख लोगों के लिए खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है। वर्ष 2008 में आए तूफान नर्गिस से बर्मा में करीब एक लाख से ज्यादा लोग मारे गए थे।
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक असम, मिजोरम, मणिपुर, त्रिपुराऔर नागालैंड में गुरुवार और शुक्रवार को तेज हवा के साथ बारिश की संभावना व्यक्त की गई है । इसके अलावा आंध्रप्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में तेजी हवाएं चलने की आशंका है। ओडिशा में इसको लेकर अलर्ट भी जारी किया गया है। इन राज्यों में मछुआरों को समुद्र में न जाने और तटों से दूर रहने की चेतावनी दी गई है। आशंका जताई जा रही है कि गुरुवार सुबह ये तूफान बांग्लादेश के तटीय इलाकों में आकर टकराएगा। इस तूफान के डर से पलायन कर रहे लोगों के लिए अस्थाई शिविरों की व्यवस्था भी की गई है।
बांग्लादेश में अधिकारियों ने चटगाँव और कॉक्स बाज़ार के निचले इलाकों में खतरे का स्तर बढ़ा कर सात कर दिया है। ये तूफान बंगाल की खाड़ी से होता हुआ उत्तर पूर्व की ओर बढ़ रहा है। बांग्लादेश के मौसम विभाग के मुताबिक तूफान से तटीय इलाकों में दो मीटर लंबी लहरें उठ सकती हैं। खतरा कम होने तक चटगाँव और कॉक्स बाजार के हवाईअड्डे बंद कर दए गए हैं।
म्यांमार में मंगलवार को 50 रोहिंग्या मुसलमानों के डूब कर मर जाने की आशंका है। इन लोगों को नाव के ज़रिए सुरक्षित इलाके में ले जाया जा रहा था लेकिन नाव डूब गई। बर्मा के राष्ट्रीय योजना विभाग के मंत्री टिन नियांग श्वेन ने कहा है कि एक लाख पचास हजार लोगों को ऊंचाई वाले इलाकों में ले जाया गया है।