बाढ़ से बीआरओ की शिवालिक परियोजना सबसे ज्यादा प्रभावित

26_06_2013-flood26प्रणय उपाध्याय, नई दिल्ली। उत्तराखंड और हिमाचल में बाढ़ के कहर ने चीन के साथ सटी सीमा पर चल रही रणनीतिक सड़क परियोजनाओं को भी महीनों पीछे धकेल दिया है। चीन के साथ सरहद साझा करने वाले उत्तराखंड और हिमाचल में सीमा सड़क संगठन की एक दर्जन से अधिक ऐसी सड़कों को नुकसान पहुंचा है, जो रणनीतिक लिहाज से खासी अहम हैं। राहत और बचाव अभियान से जुड़े सीमा सड़क संगठन के दस्ते बाढ़ प्रभावित इलाकों में भूस्खलन से टूटे रास्तों को बहाल करने के साथ ही सैन्य संपर्को के लिहाज से अहम मार्गो को भी बहाल कर रहे हैं। फिलहाल, प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने और उन तक राहत सुविधाएं पहुंचाने के लिए सड़कों को बहाल करने की है। रक्षा मंत्रलय अधिकारियों के मुताबिक, उत्तराखंड में बीआरओ की शिवालिक परियोजना ही सबसे अधिक प्रभावित हुई है, जिसकी 12 सड़कों को नुकसान पहुंचा है। शिवालिक परियोजना में जोशीमठ से मालारी के बीच सड़क पर कई टुकड़े बह गए हैं। चीन सीमा के लिहाज से अहम नागा-सोनम सड़क का काम भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नागा जोधाग के बीच पाच किलोमीटर लंबी सड़क बेकार हो गई है। चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थित माना पास के करीब घस्तोली-रत्ताकोना के बीच सड़क बनाने का काम प्रभावित हुआ है। उत्तराखंड में ही बीआरओ की हीरक परियोजना भी प्रभावित हुई है। इसकी आधा दर्जन सड़कें प्रभावित हुई हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा के नजदीक तवाघाट से घाटिबागढ़ के बीच 19 किमी से अधिक लंबी सड़क को हुए नुकसान का आकलन ही नहीं हो पाया है। इस इलाके तक बीआरओ की टीमें हीं नहीं पहुंच पाई हैं। चीन सीमा से सटे हिमाचल प्रदेश में भी रणनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण सड़कों पर असर पड़ा है। बीआरओ के प्रोजेक्ट दीपक की पाच सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिनमें सबसे अहम वागथू-पूह राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-5 भी है। रणनीतिक लिहाज से अहम इस सड़क पर 2300 मीटर के टुकडे में 57 जगह भारी भूस्खलन से नुकसान हुआ है। हालाकि सड़कों की सेहत सुधारने के लिए सीमा सड़क संगठन ने अपने 4000 लोगों और कई मजदूरों के साथ अभियान छेड़ रखा है। इसके अलावा जेसीबी, एक्सकेवेटर जैसी करीब 100 मशीनों को सफाई के लिए उतारा गया है। रक्षा अधिकारी मानते हैं कि इसकी भरपाई में कई महीने लग सकते हैं।

error: Content is protected !!