
जयपुर। लैंगिक आधारित भेदभाव एवं महिला हिंसा को बढ़ावा देने में स्त्री विरोधी लोकप्रिय टी.वी. सीरियल जिम्मेवार हैं। पूंजीवाद की गिरफ्त में मीडिया के इस हथियार का विरोध करने में समाज को आगे आना चाहिये। वातावरण एवं मानसिकता में बदलाव लाने के लिए अभियान चलाया जाना चाहिये। उक्त मत आज झालाना स्थित राजस्थान प्रौढ़ शिक्षा संस्थान में सोसायटी टू अपलिफ्ट रूरल इॅकोनामी (श्पोक) द्वारा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यू.एन.डी.पी.) के सहयोग से जेण्डर आधारित हिंसा पर आयोजित कार्यशाला में व्यक्त किया गया। दूरदर्शन केन्द्र के निदेशक, कृष्ण कल्पित ने कार्यशाला में मुख्य अतिथि के तौर पर बोलते हुए कहा कि समाज में समरसता खत्म होने से लैंगिक आधारित भेदभाव हमारी जिन्दगी का रोजमर्रा का विषय बनकर बढ़ रहा है। यह शर्मनाक स्थिति है।
श्योर संस्था द्वारा यू.एन.डी.पी. के सहयोग से राजस्थान के संभागीय स्थित शहरों-जयपुर, अजमेर, भरतपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा व बीकानेर में जेंडर आधारित हिंसा पर शहरी युवाओं को संवेदनशील बनाने के लिए एक वर्षीय परियोजना संचालित की गई। परियोजना निदेशक सत्यदेव बारहट ने समानता के आधार पर महिला के दोयम दर्जे को कम करने में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास इस परियोजना के दौरान किये जाने की जानकारी दी। इसमें महाविद्यालयों की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाईयों (एन.एस.एस.) को जोड़ा गया।
यू.एन.डी.पी. की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. कान्तासिंह ने प्रश्न उठाया कि महिलाओं के मुद्दे महिलाओं तक ही सीमित किये जाने की मानसिकता में कब बदलाव आयेगा? देश के विकास में महिलाओं की भूमिका को कम नहीं आंका जाना चाहिये।
नौसेना एवं एन.सी.सी. के कैप्टन शिव लाल ने कहा कि देश में 13 लाख एन.सी.सी. के केडेट्स हैं – जो जन-जागरूकता में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है।
इस कार्यशाला में डिग्निटी गर्ल्स फाउन्डेशन की अध्यक्ष डॉ. मीता सिंह कानून प्रोफेसर अरूण शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता राजाराम भादू सहित विभिन्न शहरों से आये युवक-युवतियों ने भाग लिया। हरिदेश जोशी पत्रकारिता विश्व-विद्यालय के उपकुलपति सन्नी सेबस्टियन की अध्यक्षता में आयोजित तकनीकी सच में बीकानेर विश्वविद्यालय की उपकुलपति चन्द्रकला पाडिया एडवोकेट अरूण शर्मा सहित कई वक्ताओं ने भाग लिया।
कल्याण सिंह कोठारी
मीडिया सलाहकार
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