पिटाई से नहीं, व्यवहार से सुधरते हैं बच्चे

img_20160917_113056बीकानेर।
अगर आपका बच्चा जिद्दी है, पढ़ता नहीं है, नींद बहुत आती है या फिर दिनभर कंप्यूटर या टीवी पर लगा रहता है तो इसका उपचार उसके साथ मारपीट करना कतई नहीं है। अभिभावक अपने व्यवहार में थोड़ा बहुत परिवर्तन करके ही समस्या से निजात पा सकता है। यह कहना है बीकानेर के प्रमुख मनो चिकित्सक डॉ. सिद्धार्थ असवाल का। यहां अंत्योदय नगर स्थित रमेश इंग्लिश स्कूल (आरईएस) में चिकित्सकों और अभिभावकों के बीच एक सेमिनार का आयोजन रखा गया। इस दौरान जिला क्षय अधिकारी डॉ. सी.एस. मोदी ने बच्चों को स्वच्छ वातावरण देने की अपील की।
आरईएस के सभागार में बड़ी संख्या में पहुंचे अभिभावकों को डॉ. असवाल ने कहा कि बच्चों का व्यवहार समझने और उसे सुधारने का काम माता और पिता ही कर सकते हैं। दो तरीके से बच्चों को बुरी आदतों से किनारे किया जा सकता है। पहले तो उसे भावनात्मक रूप से समझाया जाए। अगर वो नहीं माने तो उसे थोड़ा दंड देना चाहिए। यह दंड उसे पीटने के रूप में नहीं हो बल्कि उसकी पसन्द पर रोक लगाना हो। अगर बच्चा पढ़ता नहीं है और सिर्फ खेलता है तो उसे सशर्त खेलने की अनुमति दी जाए कि पहले पढ़ाई करें। डॉ. असवाल ने कहा कि बच्चे को अगर डर लग रहा है तो यह सामान्य बात नहीं है। उसके डर का स्तर देखें अगर पानी सहित अन्य चीजों से बहुत ज्यादा डर लगता है तो उसे चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। वैसे यह प्रयास करना चाहिए कि उस डर को दूर करने का प्रयास हो।
इस मौके पर डॉ. सी.एस. मोदी ने कहा कि बच्चों पर अतिरिक्त दबाव बनाने का प्रयास नहीं करें। नर्सरी कक्षा के विद्यार्थी पर ही परीक्षा का दबाव बना दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अगर बच्चा स्वस्थ नहीं होगा तो वो बीमार रहेगा और बीमारी उसकी पढ़ाई को प्रभावित करेगी। उन्होंने बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए घर के आसपास मच्छरों को मारने, हाथ की नियमित और बेहतर सफाई करने सहित अनेक नियमित कार्यों को देखना चाहिए। इस मौके पर विद्यालय निदेशक सेणुका हर्ष ने आभार व्यक्त किया। मैनेजर स्वरूप सिंह दैनिक नेशनल राजस्थान के निदेशक अरविन्द व्यास ने स्मृति चिन्ह भेंट किए।

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