ठिकाना रेटा निवासी ठाकुर गोपाल सिंह सा के सुपुत्र कु. विश्व्नाथ प्रताप सिंह का विवाह जाम्भा निवासी राजा शिवदत्त सिंह राजवी की सुपुत्री शेल कँवर राजवी के साथ शाही लवाजमे जिसमे हाथी घोड़े ऊँट आदि के साथ सम्पन्न हुवा।
वैसे तो ये विवाह पूर्ण रजपूती परम्परा के साथ सम्पन्न हुवा जिसमे शाही वेशभूषा सजे धजे राजपूत सरदार अपने समाज गोरव विप्सा रेटा के साथ नजर आये प्रत्येक बराती को ससम्मान स्वरूप बिद गोठ में एक एक तलवार भेंट की गई।कुल 276 सजातीय बरातियो भेट दी गयी
इस विवाह की सबसे अदभुत बात यह थी की वर पक्ष द्वारा वधु पक्ष से किसी भी प्रकार का दहेज नही लिया गया और शादी पूर्णतया सात्विकता नशाबंदी के साथ स्म्पप्न हुयी खाने में था राजस्थानी खाने का जायका जिसमे केर सागरी की सब्जी व् बाजरे की रोटी ,मक्के की रोटी बेजड की रोटी ,राजस्थनी कदी,गोविन्द गट्टा मिर्च के टपोर,लहसुन की चटनी सहित कई आयटम थे खाना बनाने व परोसने वाले भी राजस्थानी वेशभूषा में थे
जैसा की ज्ञात है कि पश्चिमी राजस्थान में अम्ल की रेयाण परम्परा बहुत जोरो पर हे पर इस विवाह में वर व् वधुपक्ष ने इस प्रथा को दरकिनार करते हुवे शराब व् अम्ल के स्थान पर शरबत परोसी गई ।साथ ही शादीके साथ साथ गाव में भी स्वेच्छिक रूप शराब और मॉस पर भी पूर्ण प्रतिबंध था।
राजपाल सिंह दुदु ने बताया कि कु विश्व्नाथ प्रताप सिंह जय राजपुताना संघ के संस्थापक सदस्य हे और शराब और मॉस बंदी के समर्थक हे इसी पहल की शुरुवात उन्होंने खुद से करते हुवे समाज में एक सन्देश दिया। और समाज में एक नई मिशाल कायम की।गोरतलब है की पिछले कई वर्षो से विश्वनाथ प्रताप सिंह समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ लड रहे है और एक बड़ा राजपूत युवा वर्ग उन्हें अपना आदर्श मानता है
इस विवाह समारोह में भारत के विभिन्न राज्यो से कई बड़ी हस्तियों के साथ युवा ह्रदय सम्राट शेर सिंह राणा , करनी सेना संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी , राजपूत सभा अध्यक्ष गिरिराज सिंह लोटवाड़ा ने शिरकत की और इस पहल के लिये धन्यवाद दिया।