प्रसव के दौरान मातृ एवं नवजात शिशु सेवाओं मे जटिलता प्रबंधन पर प्रशिक्षको की पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला ।
27 अप्रैल 2017, बारां । जिले मे अक्षदा कार्यक्रम के अंतर्गत 24 अप्रैल, 2017 से स्वास्थ्य विभाग एवं एच एल एफ पी पी टी के सहयोग से जिला चिकित्सालय स्थित प्रशिक्षण भवन मे प्रसव के दौरान मातृ एवं नवजात सेवाओं मे उत्पन्न होने वाली जटिलताओ के प्रबंधन पर पाँच दिवसीय आवासीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है ।
अक्षदा कार्यक्रम राजस्थान सरकार एवं टाटा ट्रस्ट के सहयोग से अंतरा फाउंडेशन द्वारा वर्तमान में बारां और झालावाड़ जिले में किर्यान्वित किया जा रहा है | इस कार्यक्रम का उद्देश्य राजस्थान में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में करना है, जिसको जल्द ही सरकारी तंत्र द्वारा व्यापक किया जायेगा ।
कार्यशाला का आरंभ डॉ. सम्पत राज नागर, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, जिला चिकित्सालय बाराँ द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया । डॉ. नागर ने अपने उदबोधन मे इस कार्यशाला का महत्व एवं उद्देशय बताते हुये कहा कि इस प्रशिक्षण के उपरांत प्रशिक्षार्थियों द्वारा खंड स्तर पर प्रसव केन्द्रो के लेबर रूम मे कार्यरत नर्सिंग स्टाफ का क्षमता वर्धन किया जाएगा, जिससे उन्हें प्रसव के दौरान मातृ एवं नवजात सेवाओं मे उत्पन्न होने वाली जटिलताओ के प्रबंधन मे मदद मिलेगी जिसके फलस्वरूप मातृ एवं शिशु मृत्यु दर मे कमी आयेगी । साथ ही उन्होने प्रतिभागियों को पूरी लगन से प्रशिक्षण लेने हेतु प्रेरित किया ।
इस कार्यशाला मे जिले की 15 प्रसविकाओ को प्रसव के दौरान मातृ एवं नवजात सेवाओं मे उत्पन्न होने वाली जटिलताओ एवं उनके प्रबंधन जैसे प्रसव पूर्व एवं पश्चात रक्त स्राव, नवजात मे श्वसन अवरोध, प्रसव पश्चात माता एवं नवजात शिशु की देखभाल, कंगारू मदर केयर आदि की जानकारी विस्तृत रूप से दी गई । यह प्रशिक्षण पूर्णतया प्रयोगिक अभ्यास पर आधारित है जिसमे प्रतिभागियों द्वारा डमी पर अभ्यास कर कौशल मे वृद्धि की जा रही है ।
प्रतिभागी रजनी बेला, नर्स सीएचसी अंता ने बताया कि, “प्रशिक्षण के दौरान मैंने ऐसी नई बातें सीखी जो मुझे पहले सही तरीके से करनी नहीं आती थी । ट्रेनर द्वारा हमे बहुत अच्छे व सरल तरीके से समझाया गया । इस प्रशिक्षण के बाद अब मैं अच्छी व गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदान करने मे सक्षम हूँ ।”