फ़िरोज़ खान
बारां 17 जून। कैट के प्रदेश मंत्री व बारां व्यापार महासंघ अध्यक्ष ललित मोहन खण्डेलवाल ने 1 जुलाई से लागू होने वाली जीएसटी प्रणाली को लेकर चिन्ता व्यक्त करते हुये बताया कि आनन-फानन में जीएसटी को लागू किया जा रहा है उससे व्यापार जगत में काफी परेशानियां बढ़ेगीं। एक ओंर तो हजारों व्यापारी विभागीय उदासीनता के चलते अपनी फर्मो को जीएसटी में अपग्रेड नही करा पाये वहीं अब तक यह भी स्पष्ट नही है कि 30 जून तक प्रतिष्ठानों पर बचने वाले स्टाॅक का व्यापारी नये टैक्स में किस तरह समायोजन करेगें। क्योंकि व्यापारियों के पास मौजूद स्टाॅक पूरी तरह टैक्स पेड है, ऐसे में उस पर जीएसटी लगने के बाद वैट का भुगतान किस प्रकार मिलेगा। खण्डेलवाल ने बताया कि सरकार द्वारा जीएसटी की जो दरें निर्धारित की गई है वह सही नही है। आम उपभोक्ता के जीवन में प्रतिदिन उपयोग में आने वाले खाद्य पदार्थ पर जीएसटी काफी अधिक है, वहीं केन्द्र सरकार ने बड़ी कुशलता के साथ पेट्रोलियम तथा आबकारी को जीएसटी के स्लेब में नही डाला। यदि सरकार पेट्रोलियम को भी जीएसटी में शामिल करती तो सर्वाधिक 28 प्रतिशत टैक्स के बावजूद देश की जनता को पेट्रोल 14 रूपये लीटर व डीजल 12 रूपये सस्ता मिलता। ऐसे में अन्य मदों में जीएसटी की मार झेल रहे व्यापारियों व उपभोक्ता को पेट्रोल, डीजल व गैंस आदि की कीमतों से काफी राहत मिलती। खण्डेलवाल ने बताया कि दुनिया के किसी भी देश में जहां जीएसटी प्रणाली लागू है उनमें से सर्वाधिक चीन में 17 प्रतिशत जीएसटी है वहीं अन्य 47 देशों में जीएसटी की दर 3 से 12 प्रतिशत है। कैट के प्रदेश मंत्री ने आश्चर्य व्यक्त करते हुये कहा कि एक ओर भाजपा तथा देश के प्रधानमंत्री ने कांग्रेस शासन में जीएसटी के 14 प्रतिशत सर्वाधिक स्लेब पर आपत्ति जताते हुये पुरजोर विरोध किया था तथा गुजरात के मुख्यमंत्री रहेते हुये स्वयं प्रधानमंत्री ने जीएसटी प्रणाली को देश के लिये व्यवहारिक बताते हुये कांग्रेस शासन में विरोध किया था। अब यही सरकार जीएसटी के प्रति स्नेह का इजहार करते हुये जीएसटी के स्लैब को 14 प्रतिशत से बढ़ाते हुये 28 प्रतिशत तक ले गई।
खण्डेलवाल ने व्यापारियों की समस्याओं पर चिन्ता व्यक्त करते हुये बताया कि जीएसटी व्यापार व व्यापार जगत के लिये अव्यवहारिक रहेगा। 10 दिन में एक रिटर्न महिने में 3 रिटर्न वर्ष में 37 रिटर्न व्यापारियों के सिरदर्द बढ़ाने वाला है। इस प्रणाली से छोटे व मध्यम व्यापारी काफी परेशान होंगें। जहां सरकार जीएसटी लागू करने जा रही है, इस जीएसटी को अलग-अलग स्तर पर लागू करना भी सही नही है। बेहतर होता उत्पादन पर ही टैक्स लग जाता तो व्यापारी को इंस्पेक्टरी राज की रोज-रोज परेशानियों से भी छुटकारा मिल जाता।