नशे की लत ने युवाओं को किया खोखला: श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र
पैसा लेकर मार्ग दिखाने वाले गुरु नहीं: दिनेष मुनि
पूना 9 जुलाई 2017।
श्रमण संघीय सलाहकार दिनेष मुनि ने कहा कि गुरुपूर्णिमा का दिवस गुरुओं को वंदन करने और उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का दिन है। गुरु शब्द के मायने क्या हैं? गु का मतलब होता है अंधकार और रु का अर्थ है जो उसे भगाता है। जो कोई भी अंधकार को दूर करता है, वह गुरु है। गुरु कोई इंसान नहीं हैं। वह एक संभावना हैं। आधुनिक भाषा में कहें तो गुरु एक जीवंत रोडमैप हैं। अगर यह रोडमैप मुफ्त में मिल रहा है तो फिर दिक्कत क्या है? इस रोडमैप को देखिए और सही दिशा की जानकारी लीजिए। आज के दौर में पुराने गुरुओं की जरुरत महसूस हो रही है, पैसा लेकर मार्ग दिखाने वाला गुरु नहीं हो सकता, गुरु वह है जो सत्य, अहिंसा का मार्ग दिखाता है, आत्मा को परमात्मा से एकाकार करवाता है। वे आज रविवार 9 जुलाई 2017 को पूना शहर के कात्रज स्थित ‘आंनद दरबार’ में चातुर्मासिक प्रवचन माला के अन्तर्गत ‘गुरू पूर्णिमा’ के अवसर पर धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
उन्होने आगे कहा कि गुरुओं का दायित्व हो जाता है कि अनुयायियों के दिशा भ्रष्ट होने पर उन्हें सत्य दिशा का दिग्दर्शन कराएं। उन्होनें आगे कहा कि मेरे आध्यात्मिक जीवन में गुरु पुष्कर – गुरु देवेन्द्र का अनंत उपकार है कि उन्होंने (मुझे) चतुरलाल को दिनेष मुनि बना दिया। उन्होंने मुझे मोक्ष का मार्ग दिखा दिया। उनका कहना था कि अब भी समय है कि पूरे देश के सभी संप्रदायों के धर्म गुरुओं को ‘सबका साथ – सबका विकास’ के तहत अपने – अपने स्तर पर ही सही जनता की बुराईयों की प्रवृर्तियों को रोकने का प्रयास करे तो स्वर्णिम भारत का जन्म हो सकता है।
डॉ. द्धीपेन्द्र मुनि ने कहा कि पाश्चात्य शिक्षा के पीछे भागने के कारण न तो शिक्षको में गुरुतर भाव विकसित हुआ है और न ही छात्रों में गुरुओं के प्रति सम्मान। आवश्यकता है छात्रजन गुरुओं का सम्मान करें।
जैनत्व संस्कार दीक्षा संपन्न।
पूना शहर में प्रथम बार आयोजित हुए संस्कार दीक्षा समारोह में श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र ने उपस्थित युवा पीढी के अभिभावकों से आहवान किया कि युवा धरोहर को संरक्षित करें। जैनत्व संस्कार दीक्षा के अंतगर्त सर्वप्रथम नवकार महामंत्र का सुमिरण किया गया उसके पश्चात् उपस्थित श्रावक – श्राविकाओं, युवक – युवतियों को जैनत्व के सिद्धांतों व नियम समझाते हुए ‘सप्त कुव्यसन’ की प्रतिज्ञा संपन्न करवाई। उन्होने कहा कि युवाओं को अपनी कमाई का एक फीसदी हिस्सा माता पिता को देना चाहिए, ताकि उनको दान पुण्य करने के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाने पड़े। भारत का भविष्य युवा वर्ग है। लेकिन नशे की लत इन युवाओं को खोखला कर रही है। गांव के गलियारे से लेकर संसद के चौराहे तक नशे की जड़ें फैली हुई हैं। कौन रोकेगा इस तबाही को ? आगे कहा कि छोटे से बच्चे के हाथ में सिगरेट, गुटखा पहुंच गया है। यह बहुत चिंतनीय विषय है। प्रत्येक पाउच पर कैंसर होने की चेतावनी के बाद भी अपने जीवन से खिलवाड़ क्यों करते हो। शराब आधुनिक फैशन का रूप ले चुकी है। ध्यान रखो, एक व्यक्ति शराब पीता है तो दुर्दशा पूरे परिवार की होती है। यह नशा हमारे देश के आंतरिक ढांचे को खोखला बना रहा है। जैनत्व संस्कार दीक्षा के अंतर्गत श्रावक – श्राविकाओं व युवा पीढी ने सप्त कुव्यसन को त्यागने का संकल्प लिया जिससे हर्ष हर्ष के जयकारों से आनंद दरबार गुंज उठा।
आयंबिल तप की कड़ी में आज श्रीमती मंजूषा धोका ने नियम ग्रहण किये तथा एक घंटें का नवकार महामंत्र जाप श्री दिलीप संचेती परिवार द्वारा आयोजित किया गया। सुश्री खुषी आबड़ ने गीतिका प्रस्तुत की। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सलाहकार दिनेष मुनि ने उपस्थित श्रद्धालुजनों को आर्षीवाद देते हुए मंगलपाठ सुनाया।