विश्व गठिया दिवस के अवसर पर गुरूवार को पीबीएम हॉस्पिटल मेे मेडिकल आउटडोर में न्यू ओपीडी ब्लॉक के कमरा नं 4 में 11 से 2 बजे तक गठिया रोग के मरीजो को परामर्श व जानकारी दी जाएगी।
अतिरिक्त प्राचार्य प्रथम व गठिया एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ पीबीएम अस्पताल डॉ. लियाकत अली गौरी ने बताया कि यह दिन मस्कुलोस्केलेटल रोगों के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए समर्पित है और 12 अक्टूबर को हर वर्ष मनाया जाता है। इस साल विषय है, ’’यह आपके हाथों में है, कार्यवाही करें’’। यह विषय उन लोगों के लिए है जो संधिशोथ और मस्कुल्कोकेलेटिकल रोगों (आरएम) से पीड़ित हैं, ताकि उन्हें बेहतर तरीके से रहने,कार्रवाई करने ओर मोबाइल होने पर वे पूरी तरह से अपने जीवन जीना चाहते हैं।
उन्होंने बताया कि संधिशोध जोड़ों की सूजन को संदर्भित करता है और आमतौर पर जोड़ों में दर्द, कठोरता और सूजन की विशेषता होती है। यद्यपि, यह 100 से अधिक विभिन्न संयुक्त रोगों के रूप में प्रकट होता है फिर भी यह आमतौर पर ओस्टियोआर्थराइटिस (सटे हड्डियों के उपास्थि को क्षति के कारण होता है) और रूमेटीयड आर्थराइटिस (स्वस्थ संयुक्त ऊतकों पर प्रतिरक्षा तंत्र के हमले के कारण ) के रूप में होता है। बढ़ती उम्र के साथ गठिया का खतरा बढ़ जाता है। पुरूषों की तुलना में महिलाएं इस रोग को प्राप्त करने के लिए अधिक प्रवण हैं। भारत में गठिया का एक उच्च प्रसार है, लगभग 15प्रतिशत लोगों के साथ, इसके 18 मिलियन से अधिक लोग प्रभावित होते हैं।
गठिया के लक्षण- जोडों में दर्द या कोमलता, जोड़ों के आसपास कठोरता, सूजन या लालिमा,
जोड़ों में सीमित आंदोलन, जोड़ों की विकृति, वजन घटाने और थकान, जोड़ों में शोर से क्रैकिंग करना।
रूमेटॉइड आर्थराईटिस
रह्यूमेटोइड – आर्थ्राईटीस एक ऑटो-इम्यून बीमारी है जिसके जोड़ों का दर्द व सूजन मुख्य लक्षण है इसे आम भाषा में गठिया कहते हैं।
लक्षण- अगर सुबह उठते ही आप की अंगुलियां मुड़ जाती हैं, बहुत कमजोरी, थकावट व बुखार की सी हालत हो जाती है, जोड़ों में दर्द होता है, सारे शरीर में जकड़न हो जाती है, तो आपको रह्यूमेटोइड – आर्थ्राईटिस की बीमारी हो सकती है। यह किसी भी उम्र में हो सकती है। अगर यह सोलह वर्ष से कम उम्र में हो तो इसे ज्युवेनाइल रह्यूमेटोइड – आर्थ्राईटिस कहते हैं। औरतों में आदमियों से तीन गुणा ज्यादा होती है। विश्व की करीब 1 प्रतिशत आबादी रह्यूमेटोइड – आर्थ्राईटिस से पीड़ित है। परिवार के कई सदस्य इस बीमारी से पीड़ित हो सकते हैं, यानि यह जैनेटिक लक्षण को इंगित करता है ।
नार्मल व आथ्राईटिक जोड़
जोड़ वह है जहां दो हड्डियां मिलती है व शरीर के भागों की गति होने देती है। आथ्राईटिस का मतलब है जोड़ का इनफ्लेमेशन, जिसमें जोड़ सूज जाते हैं, दर्द होता है, जकड़ जाते हैं व लाल हो जाते हैं। रूमेटिक बीमारियों के इनफ्लेमेशन में टेडनस, लिगामेन्ट्स व मॉंसपेषियों का भी इनफ्लेमेशन हो जाता है ।
रह्यूमेटोइड – आर्थ्राईटीस के कुछ रोगियों में क्रानिक इनफ्लेमेशन से कार्टिलेज, बोनस (हड्डियां) व लिंगामेन्ट्स के विकृत हो जाने से जोड़ विकृत हो जाते हैं।
रह्यूमेटोइड – आर्थ्राईटीस क्यों होती है ?
रह्यूमेटोइड – आर्थ्राईटीस के सही कारणों का पता नहीं है। कुछ वायरस, बैक्टीरिया व फंगाई भी इसका कारण हो सकते है मगर इनमें से कोई भी कारण पुख्ता सिद्ध नहीं हुआ है।
रह्यूमेटोइड – आर्थ्राईटीस के कारणों को जानना विष्व स्तर पर एक खोज का विषय है। कुछ वैज्ञानिक यह कहते है कि ये बीमारी जेनेटिकली इनहीरटेड है । यह संदेह है कि कुछ इनफेक्षन या वातावरण से सम्बन्धित फेक्टर्स शरीर के इम्युन सिस्टम पर ऐसा असर डालते है कि वे शरीर के ऊतकों पर असर करते हैं और शरीर के विभिन्न अंगों जैसे फेफड़े, हृदय, आंखे आदि को नुकसान पहुंचाते है ।
रह्यूमेटोइड – आर्थ्राईटीस केवल जोड़ों की ही बीमारी नहीं है बल्कि यह शरीर के विभिन्न अंगों को भी प्रभावित करती है यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है ं इम्यून कोषिकायें जैसे लिम्फोसाइट्स कहते हैं, एक्टिवेट हो जाते है व रासायनिक संदेषवाहक (साइटोकिन्स जैसे ट्यूमर नेक्रोसिस फेक्टर व इंटरल्यूकिन-1) इन्फलेमड ऐरिया में मिलते है । वैज्ञानिकों ने पाया कि धुम्रपान करने वालों में रह्यूमेटोइड – आर्थ्राईटीस बहुतायत से होती है ।
रह्यूमेटोइड – आर्थ्राईटिस के लक्षण:
शरीर के किसी भी जोड़ में दर्द, सूजन व लाल हो जाना इसके मुख्य लक्षण है ं जब बीमारी एक्टिव होती है तो थकान, भूख नहीं लगना, हल्का बुखार, मांस पेषियों व जोड़ों में दर्द व शरीर में जकड़न महसूस होती है ।
मार्निंग स्टिफनेस – यानि सुबह उठते ही शरीर में जकड़न महसूस होना व धीरे-धीरे यह जकड़न कम हो जाती है, बीमारी ज्यादा हो तो यह जकड़न कई घंटों तक रह सकती है ।
रह्यूमेटोइड – आर्थ्राईटीज में कई जोड़ एक साथ सिमिट्रिकल पेटर्न (षरीर के दोनों साइड के जोड़ एक साथ) में प्रवाहित होते है । दोनों हाथों के छोटे जोड़ व कलाई (स्टिट ज्वाइंट) अक्सर प्रभावित होते है ं पैरों की छोटे जोड़ व टखनों (एंकल जोइंट) के जोड़ भी प्रभावित होते है व धीरे-धीरे शरीर में बड़े जोड़ जैसे कंधे, कुहनी, एल्बो, हिप, घुटने आदि में भी बहुत दर्द होता है व सूज जाते है । कई बार तो यह क्रिकोएरीटीनोइड जोड़ पर भी असर होता है जिससे रोगी की आवाज भी प्रभावित हो सकती है । (हार्सनेस ऑफ वॉइस)
रह्यूमेटोइड – आर्थ्राईटीस जोड़ों के अलावा शरीर के विभिन्न अंगों पर भी असर करती है । जैसे:- आँखें शुष्क होना (आँसू निकलने बंद हो जाना व मुंह भी शुष्क हो जाना,आँखें लाल हो जाना, प्लूयूरिसी ;चसमनतपेलद्ध से छाती मे दर्द हो जाना, प्लूयरल केवटी में पानी भर जाना जिसे प्लयूरल एफ्यूरल एफ्यूजन कहते है। फेफड़ों में रह्मेटाइड नाड्यूल बन जाते है, आई.एल.डी.(एन्टरसिटिटियल लंग डिजीज) की बीमारी, ब्रोक्यिोलाइटिस, पेरिकारडाइटिस व पैरिकारडियल व हार्ट अटैक, एनिमिया, फेल्टी सिन्ड्रोम ;थ्मसजलद्ध शरीर की खून की सफेद रक्त कोशिकाएं कम हो जाती है व तिल्ली बढ़ जाती है, बेस्कुलाइटिस (ब्लड वेसल्स का इन्फ्लेमेशन) से नाखूनो में छोटे-छोटे धब्बे, लेब अल्सरस (पैरों पर घाव) स्ट्रोक (लकवा आदि), हाथांे व पेरो की अंगुलियो में गैग्रीन हो जाना।