अधिवक्ता नामांकन में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, 9 सितंबर तक सभी लंबित आवेदनों के निस्तारण के आदेश
जयपुर (मनोज आहूजा)। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने अधिवक्ता के रूप में नामांकन के लिए लंबे समय से लंबित आवेदनों को लेकर महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।एस.बी. सिविल रिट पिटीशन संख्या 9369/2026, सुरेन्द्र खिंची बनाम बार काउंसिल ऑफ राजस्थान एवं अन्य मामले में सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति शुभा मेहता ने राजस्थान बार काउंसिल को निर्देश दिए हैं कि 3 सितंबर 2026 तक अधिवक्ता नामांकन के लिए लंबित सभी आवेदन-पत्रों का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार 9 सितंबर 2026 तक निस्तारण किया जाए तथा संबंधित अभ्यर्थियों को इसकी सूचना दी जाए।
चुनाव एवं प्रशासनिक कारणों से अटके थे नामांकन
मामले में याचिकाकर्ता ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय, जयपुर से वर्ष 2025 में विधि स्नातक करने के बाद राजस्थान बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। आवश्यक दस्तावेज एवं शुल्क भी जमा कराए गए थे,लेकिन बार काउंसिल के चुनाव एवं प्रशासनिक कारणों से आवेदन पर निर्णय नहीं हो सका।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि नामांकन लंबित रहने के कारण उन्हें विधि व्यवसाय शुरू करने में परेशानी हो रही है तथा उनके व्यावसायिक कैरियर एवं आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
नामांकन समिति भी नहीं थी कार्यरत
सुनवाई के दौरान बार काउंसिल की ओर से बताया गया कि चुनाव प्रक्रिया के चलते नामांकन संबंधी कार्य नहीं हो रहे थे।पूर्व में 24 फरवरी 2026 को नामांकन संबंधी कार्य के लिए समिति गठित की गई थी, जिसे उच्च स्तरीय चुनाव पर्यवेक्षण समिति ने 12 मार्च 2026 को निरस्त कर दिया था। इसके बाद नामांकन कार्य के लिए कोई समिति कार्यरत नहीं थी, जिसके कारण अनेक अभ्यर्थियों के आवेदन लंबित रहे।
3 जुलाई को बीसीआई चेयरमैन से भी की गई थी मांग
अधिवक्ता नामांकन में हो रही देरी का मुद्दा इससे पहले भी अधिवक्ता संगठनों की ओर से उठाया जा चुका था।3 जुलाई 2026 को अखिल भारतीय संयुक्त अधिवक्ता मंच के प्रदेश सचिव मनोज आहूजा ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा को पत्र लिखकर राजस्थान में लंबित अधिवक्ता नामांकन आवेदनों के शीघ्र निस्तारण की मांग की थी।
पत्र में नामांकन प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण विधि स्नातकों को हो रही परेशानियों तथा उनके विधि व्यवसाय शुरू करने में आ रही बाधाओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए इस मामले में आवश्यक हस्तक्षेप की मांग की गई थी।इस प्रकार अधिवक्ता नामांकन का यह मुद्दा न्यायालय के समक्ष पहुंचने से पहले ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया के स्तर पर भी उठाया जा चुका था।
चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने दिया समयबद्ध आदेश
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का अध्ययन करते हुए पाया कि सुनवाई के समय नामांकन आवेदन लंबित थे और नामांकन के लिए कोई समिति कार्यरत नहीं थी।हालांकि, 3 सितंबर 2026 तक राजस्थान बार काउंसिल के चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और परिणाम भी घोषित हो चुके थे।न्यायालय ने इस तथ्य का न्यायिक संज्ञान लिया।
न्यायालय ने यह भी ध्यान में रखा कि इसी प्रकार के कई अन्य अभ्यर्थियों के आवेदन भी अधिवक्ता के रूप में नामांकन के लिए लंबित हैं और नामांकन में देरी के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है तथा उनकी आजीविका के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
9 सितंबर तक करना होगा निस्तारण
हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए बार काउंसिल ऑफ राजस्थान को निर्देशित किया है कि 3 सितंबर 2026 तक अधिवक्ता के रूप में नामांकन के लिए लंबित सभी आवेदन-पत्रों का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार 9 सितंबर 2026 तक निस्तारण करे और संबंधित अभ्यर्थियों को इसकी सूचना दे।
आदेश का व्यापक असर
हाईकोर्ट के इस आदेश से उन सभी विधि स्नातकों को राहत मिलने की उम्मीद है,जिनके अधिवक्ता नामांकन आवेदन चुनावी अथवा प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण लंबित चल रहे थे। न्यायालय ने नामांकन प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का स्पष्ट निर्देश देकर लंबित आवेदनों के शीघ्र निस्तारण का रास्ता साफ किया है।
विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि अधिवक्ता नामांकन में देरी का मुद्दा पहले ही 3 जुलाई को अखिल भारतीय संयुक्त अधिवक्ता मंच के प्रदेश सचिव मनोज आहूजा द्वारा बीसीआई चेयरमैन मनन मिश्रा के समक्ष उठाया जा चुका था।
अब राजस्थान हाईकोर्ट के इस आदेश से लंबित नामांकन आवेदनों के शीघ्र निस्तारण को लेकर स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित हो गई है।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार 9 सितंबर 2026 तक लंबित नामांकन आवेदनों का निर्धारित प्रक्रिया के तहत निस्तारण किया जाना है।