पुरोहित ने की शिविरों की प्रगति समीक्षा

DSC07323बीकानेर, 28 अक्टूबर। विशेष योग्यजन आयुक्त धन्नाराम पुरोहित ने शनिवार को सर्किट हाउस में पंडित दीनदयाल उपाध्याय विशेष योग्यजन शिविर की प्रगति समीक्षा की। इस दौरान जिला कलक्टर अनिल गुप्ता तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक एलडी पंवार मौजूद थे।
पुरोहित ने कहा कि राज्य सरकार की संवेदनशील पहल के तहत आयोजित हो रहे इन शिविरों का लाभ समस्त दिव्यांगजनों को मिले, इसके लिए पूर्ण गंभीरता से कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि शिविरों के दूसरे चरण में ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। पहले चरण में चिन्हित प्रकरण, जिन बीसीएमएचओ को फॉरवर्ड कर दिए गए हैं, उनके प्रमाणीकरण की प्रभावी समीक्षा की जाए। उन्होंने अब तक ब्लॉकवार प्रमाणित प्रकरणों की समीक्षा की तथा इसमें और अधिक गति लाने के निर्देश दिए।
विशेष योग्यजन आयुक्त ने कहा कि सर्किट हाउस एवं इंजीनियरिंग कॉलेज सहित विभिन्न सरकारी कार्यालयों में रैंप बनाए जाएं, जिसे दिव्यांगों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो। उन्होंने सर्किट हाउस मैनेजर को सर्किट हाउस में रैंप निर्माण प्राथमिकता से करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने विभाग की अन्य योजनाओं की समीक्षा की तथा कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से संबंधित योजनाओं का क्रियान्वयन संवेदनशीलता से किया जाए।
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एनआरसीसी में ‘उष्ट्र अनुसंधान की मानव स्वास्थ्य हेतु संबद्धता‘ विषयक परिचर्चा आयोजित
बीकानेर 28, अक्टूबर। ऊँटों की संख्या में बढ़ोतरी हेतु चरागाह विकास एवं चारा फसलें उत्पादित करें, जिससे कम लागत में यह पशु, ऊँट पालकों की आजीविका चलाने में सहायक बन सके। साथ ही उष्ट्र पालकों को आर्थिक संबलता के लिए बीमा योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया जाए।
यह विचार भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र में शनिवार को ‘शुष्क क्षेत्र में पशुधन उत्पादन प्रणाली की आर्थिक चुनौतियां‘ विषयक परिचर्चा को संबोधित करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के पूर्व उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ.एम.एल. मदान ने व्यक्त किए। ‘उष्ट्र अनुसंधान की मानव स्वास्थ्य हेतु संबद्धता‘ विषयक श्रृंखला के तहत आयोजित परिचर्चा में बोलते हुए डॉ.मदान ने कहा कि बदलते परिदृश्य में भैंस एवं अन्य पशुओं की तरह ऊँट प्रजाति के लिए भी बहुआयामी उपयोग तलाशें जाएं। इनमें उष्ट्र दूध से निर्मित उत्पादों की मांग को बढ़ाया जाना सम्मिलित है।
डॉ.मदान ने देश की सकल घरेलू उत्पाद में कृषि के साथ संबद्ध पशुधन के विशेष योगदान की ओर ध्यान आकृष्ट करवाया तथा कहा कि पशुधन के लिए निवेश अधिक किया जाए तो लघु व भूमिहीन किसान भी समृद्ध किसान बन सकेंगे। देश को खुशहाल बनाने हेतु यदि पशुधन पर अधिक ध्यान केन्द्रित किया जाए तो अच्छे परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था व इसके मूलभूत ढंाचे, कृषि के साथ-साथ पशुधन उत्पादन मे सुधार, भूमिहीन किसानों की समाजाक एवं आर्थिक स्तर में आशातीत वृद्धि हेतु नीतियों के निर्माण, खेती से प्रारम्भिक शिक्षा से ही जुड़ाव हेतु कृषि शिक्षा प्रणाली के विकास, आय स्रोत के सीमित संसाधनों को बढ़ाने आदि विभिन्न पहलुओं पर विचार व्यक्त किए।
मुख्य अतिथि के रूप मे राजूवास के पूर्व कुलपति डॉ. ए.के.गहलोत ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में कृषि के साथ पशुधन अपना विशेष महत्व रखता है, किसानों एवं पशु पालकों को अपनी आमदनी में बढ़ोतरी हेतु आय के बेहतर विकल्प चुनने होंगे। प्रो.गहलोत ने राजस्थान में पशुधन तथा खासकर दूध उत्पादन की दृष्टि से समृद्धता की ओर सबका ध्यान खींचा।
इस अवसर पर केन्द्र निदेशक डॉ.एन.वी.पाटिल ने कहा कि ऊँट पालकों की आमदनी में वृद्धि हेतु केन्द्र, विकसित ऊँटनी के दूध के मूल्य संवर्धित उत्पादों हेतु जागरूकता लाने हेतु सतत प्रयत्नशील है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में उष्ट्र बहुतायत में उपलब्ध है परंतु इस आजीविका के प्रति पलायनवादी दृष्टिकोण एक समस्या बनती जा रही है। डॉ.पाटिल ने देश में कृषि एवं पशुधन पर अपनी बात रखते हुए सरकारी स्तर पर कुछ जरूरी नीतियों की भी आवश्यकता जताई ताकि पशुधन एवं पशु पालक समृद्ध हो सके। केन्द्र में आयोजित इस परिचर्चा का संचालन प्रधान वैज्ञानिक डॉ.सुमन्त व्यास ने किया।

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