सलुवा की नौजवान पीढ़ी को नाम एक निवेदन-पत्र

 ” देखो ओ दीवानों तुम ये काम न करो
सलुवा का नाम बदनाम  न करो…. “
श्याम कुमार राई

” सलुवा को बेहतर बनाने के लिए हर सलुवावासी अपने हिस्से का योगदान करें “

 सिर्फ, हमें सलुवा पर गर्व है यह कहना काफी नहीं है, सलुबा को भी हम पर गर्व होना चाहिए नाज होना चाहिए…। तब साबित होगा कि सचमुच हम सलुवा को प्यार करते हैं… हमें सलुवा पर गर्व है।
     ….. मैं यह बात दावे से कह सकता हूं कि बेशक सलुवा कई मामलो में पिछड़ा है और हो सकता है, मगर जिस शांति, सुकून,सद्भावना आपसी तालमेल और मिलजुलकर हम सब यहां बेफिक्र अपने अपने हिसाब से जीवन गुजार रहे हैं, ऐसी जगह पूरे देश में तो क्या विश्व  में भी होंगे पर बहुत ही कम हैं….यह मेरा विश्वास है। हां आपसी मतभेद, ईर्ष्या- द्वेष, असहमतियां,एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ या प्रतियोगिता की भावना रखना वो एक व्यक्तिगत भावना और समझदारी की समस्या है…।
     हमारे सलुवा में नशा खोरों, ड्रग्स और नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले नवजवानों की तादात दिन ब दिन बढ़ रही है यह खबर विभिन्न  माध्यमों से पता लगने पर हर सज्जन सलुवावासी शर्म और अपमान महसूस कर रहा है। आखिर ये नौजवान साबित क्या करना चाहते हैं?
   मैं इपनी बात उन भटके हुए युवकों तक यहुंचाना चाहता हूं….जिनकी हरकत और करतूत  आजकल हमारे सलुवा में शर्मनाक चर्चा और चिंता का विषय बना हुआ  है।
     ये ठीक है और सच भी हैं कि ये नशेबाज, उद्दंड बच्चे हमारे पैसों से नहीं,  खुद के पैसे से नशा करते हैं। ये नवयुवक न तो हमसे नशा करने को लिए  ही पैसा मांगते हैं न ही हम उन्हें पैसे दे रहे हैं।  आखिर नशा करने के लिए इन्हें कोई  दूसरे लोग पैसा दे भी क्यों? जाहिर है किसी तरह वे अंट संट तरीके से पैसा जुगाड़ करते होंगे अपने नशे की लत पूरा करने के लिए….। फिर वे अपने परिवार का सहारा बनने के लिए हाथ यैर और दिमाग क्यों नहीं चलाते जिससे घर- परिवार का सहारा वना जा सके।
     खैर, ….
      यह भी सच है कि हरेक शख्स को अपने तरीके से अपने हिसाब से खाने-पीने और जीने का अधिकार  है। पर जरा सोचिए मेरे गुमराह बच्चों कि हम आप एक सामाजिक प्राणी भी तो हैं। इसलिए समाज की कुछ सीमाएं, कायदे कानून होते हैं, उनका पालन करते  हुए  हमें समाज मे रहना होता है। एक दूसरे के सम्मान आदर का ध्यान रखते हुए  जीवन का सफर पूरा करना होता है…। अब यदि कोई  यह तर्क देकर यह कहे कहे मेरा जीवन मैं अपने तरीके जीऊंगा कहते हुए बिना कपडों के नंगा ही रास्ते पर चलने लगे तो क्या यह practical होगा…आप ऐसा करेंगे क्या, नहीं न…? बाकी आप सब काफी समझदार  हैं।
      कहते हैं एक नागरिक का अपनी ऊंगली आगे करने का  अधिकार बस वही तक है जब तक दूसरे की आंख को नुकसान न पहुंचाए…. अगर दूसरे की आंख को तकलीफ हो तथा आंख को नुकसान पहुंचाने  की सीमा छूने लगी तो जाहिर है ऊंगली करने वाले का विरोध तो होगा ही शायद उसकी ऊंगली हाथ से अलग होने की स्थिति भी आ जाए।
बात सीधी है अगर कोई किसी की भलाई नहीं कर सकता, अपने घर परिवार के लिए  उसके मन में कोई  आदर की भावना नहीं है तो फिर उसे पूरे सलुवा का अपमान करने की छूट कैसे दी जा सकती है? ऐसे लोगों को सलुवा को अपने असामाजिक हरकतों की वजह से सलुवा को बदनाम करने का कोई अधिकार नहीं है, उनके नशे की आदत से यहां का वातावरण दूषित करने नहीं दिया जाएगा, विरोध तो होगा ही…। हमे  सलुवा पर गर्व है सलुवा पर हमें नाज है, हम सलुवा से बहुत प्यार करते हैं सिर्फ  यह जुमला कहना सही नहीं है न ही चलेगा। सलुवावासी भी इस तरह रहें कि सलुवा को भी यहां के प्रत्येक नागरिक पर गर्व  हो, नाज हो….। तभी हम सलुवा के ही नहीं बल्कि देश के भी सच्चे  नागरिक कहलाएंगे….।
    कहने को तो बहुत सारी बातें हैं पर समझदारों को कम में ही समझ आ जाता है…..
   इसलिए मेरे बच्चों समान बच्चों, छोटे भाईयों अब कुछ बिगड़ नहीं है समय है यदि आप भी अपने परिवार और जिस धरती पर हम सांस लेते है उसकी खातिर हम एक सभ्य और जागरूक सलुवावासी बनकर “सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय” की भावना को आत्मसात कर जीवन बिताने की ठान तो ये ये जगह ये लोग सब सही लगने लगेगा… तो
     ” गर्व से कहो हम सब सलुवावासी हैं “
    सिर्फ हमें ही सलुवा पर नहीं
सलुवा को भी हम पर नाज है गर्व है….धन्यवाद।
   “जय सलुवा
               जय सलुवावासी”
     – श्याम कुमार राई 
             * सलुवावाला “

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