एचआईवी एड्स: बचाव ही है सही उपाय

Untitledबीकानेर। विश्व एड्स दिवस को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जनजागरण गतिविधियों के साथ मनाया गया। शुक्रवार को जिला व खंड स्तरीय कार्यशालाओं का आयोजन कर एड्स व एचआईवी सम्बंधित भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया गया। सीएमएचओ डॉ. देवेन्द्र चौधरी द्वारा “बचाव ही उपाय” के मूल मन्त्र पर जोर देते हुए एचआईवी पॉजिटिव व्यक्तियों से स्नेहपूर्ण व्यवहार करने और सरकार द्वारा उपलब्ध निःशुल्क एआरटी सेवाओं से जोड़ने की अपील की गई।
स्वास्थ्य भवन सभागार में आयोजित जिला स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएमएचओ डॉ. इंदिरा प्रभाकर ने कहा कि विभाग के प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी की जिम्मेदारी बनती है कि वे समाज में एड्स के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करें। उन्होंने बताया कि कोई भी एचआईवी पॉजिटिव हो सकता है इसलिए सावधानी बहुत जरूरी है। आवश्यकता है कि शंका होने पर नजदीकी सीएचसी, जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज के आईसीटीसी केंद्र पर निःशुल्क जांच करवाई जाए और एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने पर एआरटी दवाइयाँ (एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी ) शुरू की जाए। एड्स का सम्पूर्ण इलाज नहीं है लेकिन इसके साथ भी लम्बा जीवन जिया जा सकता है।
जिला आई.ई.सी. समन्वयक मालकोश आचार्य ने एड्स, एचआईवी और कंडोम के उपयोग पर खुल कर बात करने की वकालत की। आचार्य के अनुसार चुप्पी नहीं टूटेगी तो इस वायरस के शिकार बढ़ते रहेंगे। जरूरत है कि किशोरों-युवाओं के साथ समय रहते परामर्श किया जाए। उन्हें वो सभी जानकारी दे दी जाए जो अन्यथा मिथकों के साथ गलत माध्यम से मिल ही जाएगी। आचार्य ने जानकारी दी कि 1988 के बाद से 1 दिसंबर को हर साल विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख व्यक्ति एचआई वी पॉजिटिव हो जाते हैं हालांकि नए पॉजिटिव की दर में 65 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।
डीपीएम सुशील कुमार ने युवाओं से परामर्श के दौरान भाषा और भावार्थ का खास ध्यान रखने की बात रखी क्योंकि यदि युवाओं के मौज-मस्ती क्रियाकलापों को गलत बताया जाता है तो वे इसे गंभीरता से नहीं लेंगे। उन्हें उन्ही के अंदाज में समझाया जाना चाहिए। डिप्टी सीएमएचओ डॉ. राधेश्याम वर्मा कंडोम के उपयोग को लेकर युवाओं व हाई रिस्क समूहों जैसे ट्रक ड्राईवर, सेक्स वर्कर व घर से दूर काम करने वाले व्यक्तियों को विशेष अभियान चलाकर जागरूक करने पर जोर दिया। कार्यशाला में लेखाधिकारी विजय शंकर गहलोत, सहायक लेखाधिकारी अनिल आचार्य, अमित व्यास, मनोज आचार्य व जितेन्द्र सोलंकी ने भी अपने विचार साझा किए।

क्या है एड्स और एचआईवी ?
डॉ. प्रभाकर ने बताया कि एड्स (इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम या एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसिएंसी सिंड्रोम) एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनो वायरस) के संक्रमण की वजह से होता है, जो मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है। यह मानव शरीर के तरल पदार्थों जैसे संक्रमित व्यक्ति के रक्त, वीर्य, योनी द्रव्य आदि में पाया जाता है। एड्स या एच.आई.वी पॉजिटिव का मतलब है, एड्स का वायरस आपके शरीर में प्रवेश कर गया है परन्तु इसका यह मतलब बिलकुल भी नहीं होता है कि आपको एड्स है। एच.आई.वी. पाजिटिव होने के 6 महीने से 15 साल के बीच में कभी भी एड्स हो सकता है।

कैसे फैलता है एड्स ?
एचआईवी वायरस असुरक्षित यौन संबंध बनाने (बिना कंडोम के), ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने या फिर दूषित सुई से इंजेक्शन लगाने से फैल सकता है. यह एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं के जरिए भी शिशु को संक्रमित कर सकता है।

कैसे नहीं फैलता है एड्स ?
आई.ई.सी. समन्वयक के अनुसार एड्स के बारे में समाज में कुछ मिथक भी देखे जाते रहे हैं। ध्यान देने वाली बात ये है की एड्स हाथ मिलाने, गले लगने, चुम्बन से, सामने छींकने, बिना कटी त्वचा को छूने या एक ही शौचालय के उपयोग करने, मच्छर के काटने पर नहीं फैलता है।

लक्षण
ऽकई हफ्तों तक लगातार बुखार का रहना ऽहफ्तों खांसी रहना, मुँह में घाव होना ऽविना किसी बजह के वजन का घटना, भूख खत्म हो जाना ऽबार-बार दस्त लगना ऽगले में सूजन भरी गिल्टियों का होना और गले में खराश होना ऽत्वचा पर दर्द भरे और खुजली वाले दोदरे या लाल चक्कते हो जाना ऽरात में सोते समय पसीना आना ऽहमेशा थकान बनी रहना ऽजोड़ो में दर्द रहना

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी
बीकानेर

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