सवर्ण समाज को भारत बन्द करने की बजाय दलितों पर अत्याचार बन्द करना चाहिये यह बात प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अनुसूचित जाति जन जाति एकता मंच बाड़मेर के संयोजक लक्ष्मण बडेरा ने सवर्ण समाज द्वारा 6 सितम्बर को sc,st act के विरोध में भारत बन्द के आह्वान पर प्रतिक्रिया जारी करते हुये कही बडेरा ने कहा कि sc, st act का निर्माण सवर्णों द्वारा दलितो पर लगातार किये गये अत्याचारों की वजह से हुआ है यदि देश की भाईचारे की संस्कृति के अनुसार सामाजिक समरसता से रहते तो आज हमारे देश को जाती के आधार पर दुनिया मे नीचा नही देखना पड़ता ,दलितो का नरसंहार करना पानी पीने के नाम पर भेदभाव , मन्दिर में प्रवेश नही करने देना , शादी विवाह पर दलित वर्ग के दूल्हे घोड़ी से नीचे उतारकर मारपीट करके अपमानित करने की घटनाएं हर रोज होती है
बाड़मेर के बालोतरा उपखण्ड के कालूड़ी गांव में दलित परिवारों का हुक्का पानी बन्द करके दलित छात्रों को स्कूल जाने पर मनाई तथा गांव में किसी दलित को किसी सवर्ण दुकानदार से जरूरी सामान खरीदने व आटा चक्की पर अनाज पीसाने पर पाबंदी गांव के आम सार्वजनिक रास्ते पर चलने पर मनाई इस दबंगई पर सरकार व प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है कालूडी गांव के लोगो को पलायन की स्थिति पैदा हो गई है है जो लोग भारत बन्द करके सरकार के दलित सुरक्षा के इरादों को समाप्त करने का सपना पालकर बैठे है उनका यह सपना पूरा कभी पूरा नही होगा सवर्ण समाज के द्वारा 6 सितम्बर को किये गए भारत बन्द के आह्वान पर सवर्ण समाज को जनता ने समर्थन नही देकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के फैसले पर स्वतः ही मोहर लग गई बडेरा ने बताया कि कानून सरकार जनता के हित मे बनाती यदि कानून का उल्लंघन करोगे तो सजा होगी सरकार कमजोर वर्ग को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करके देश को आगे बढ़ा रही है
बडेरा ने कहा कि आजादी से पूर्व देश में वर्ण व्यवस्था के अनुसार राज केवल क्षत्रिय करेंगे, पढ़ेंगे केवल ब्राह्मण, व्यापार केवल वैश्य करेंगे और सबकी सेवा शुद्र करेंगे के कानून को देश की आजादी के बाद भारत रत्न बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर ने बदलकर सवर्ण जातियों का एकाधिकार समाप्त कर नए भारत भारत का नया संविधान लिखकर हर भरतीय को समान अधिकार देकर सामाजिक न्याय किया है
जाट महासभा को OBC महासंघ व अल्पसंख्यक महासंघ को एकता मंच के संयोजक लक्ष्मण बडेरा सवर्ण समाज के आह्वान पर बंद में शामिल नही होने पर इन सभी समुदायों का आभार व्यक्त किया तथा जिन्होंने बंद में शामिल होकर दलितों के बुरे दिन लाने का सपना पालने वालो को आगामी चुनावों में दलित समुदाय जवाब देगा