राजुवास में विधिक जागरूकता पर व्याख्यान

स्थाई लोक अदालतें जनोपयोगी सेवाओं से संबद्ध विवादों में शीघ्र राहत दिलाने का माध्यम

बीकानेर, 6 अक्टूबर। स्थाई लोक अदालत की अध्यक्ष डॉ. कमल दŸा ने कहा है कि स्थाई लोक अदालत जन उपयोगी सेवाओं से संबंधित विवादों और मामलों में आम जन को शीघ्र राहत दिलाने का एक प्रमुख जरिया है। न्यायाधीष डॉ. दŸा शनिवार को वेटरनरी विष्वविद्यालय के ए.बी.जी. सभागार में विधिक जागरूकता विषय पर छात्र-छात्राओं को सम्बोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि लोक अदालत आपसी हितों के टकराव से उत्पन्न विवाद को समझाइष से निपटाने का एक सषक्त माध्यम है। इससे वैर-भाव भी खत्म होता है। वर्ष 2015 में स्थाई लोक अदालतों की स्थापना करके जिला स्तरीय कैडर के न्यायाधिपति नियुक्त किए गए। ये जनोपयोगी अदालतें कहलाती हैं। स्थाई लोक अदालत में सादे कागज पर बिना कोर्ट फीस के प्रार्थना-पत्र पेष किया जा सकता है। दोनों पक्षकारों के बीच राजीनामें का प्रयास किया जाता है। यदि किसी कारणवष राजीनामा नहीं हो पाने पर दोनों पक्षों को सुनकर अंतिम फैसला सुनाया जाता है जो कि दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी होता है। स्थाई लोक अदालत का फैसला अंतिम होता है उसके विरूद्ध कोई अपील नहीं की जा सकती है। न्यायाधिपति डॉ दŸाा ने कहा कि कानून की जानकारी नहीं होना, कानून से बचाव नहीं है अतः वे समय-समय पर पारित कानूनों के बारे में भी पूरी जानकारी रखें। स्थाई लोक अदालत में जन उपयोगी सेवाओं से संबंधित एक करोड़ रूपये तक की राषि के विवादों की सुनवाई की जा सकती है। उपयोगी जनसेवाओं में सरकारी-गैर सरकारी यात्रियों एवं माल के वहन की यातायात सेवा, कोरियर, दूरसंचार सेवाएं, विद्युत एवं जलापूर्Ÿिा सेवाएं, सार्वजनिक स्वच्छता संबंधी और आवासीय सेवाएं शामिल हैं। राजकीय एवं प्राईवेट चिकित्सा सेवा, जीवन बीमा एवं सामान्य बीमा सेवा, बैंककारी व विŸाीय सेवाएं, एल.पी.जी. सेवाएं भी इसके दायरे में शामिल हैं। शैक्षिक एवं शैक्षणिक संस्थानों, आवास एवं भूसंपदा सेवाओं में न्यूनता के विवादों और मामलों की सुनवाई भी की जाती हैं। प्रारंभ में वेटरनरी कॉलेज के अधिष्ठाता प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने स्वागत भाषण किया। कुलसचिव प्रो. हेमन्त दाधीच व्याख्यान में शामिल हुए। प्रो. जे.एस. मेहŸाा ने सभी का आभार जताया।

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