2013 के संकल्प पत्र की पालना रिपोर्ट जनता के सामने पेश करे बीजेपी

शहरी रोजगार गारण्टी कानून बनाने की माँग उठाई
न्यूनतम मज़दूरी 500 रुपए की जाए, मज़दूरी निर्धारण आयोग बनाया जाए
धरने में जाग्रत महिला संगठन बारां की महिलाएं भी कर रही है प्रतिनिधित्व

फ़िरोज़ खान
जयपुर 20 अक्टूबर, 2018। जन निगरानी अभियान के छठे दिन शहीद स्मारक पर शनिवार को असंगठित क्षेत्र के मज़दूर, निर्माण मज़दूर, मनरेगा, थड़ी- ठेले कामगार, घरेलू, कचरा कामगार, हमाल आदि सैंकड़ों मज़दूरों ने अपनी समस्यायों और पीड़ाओं को बयां किया। धरने में सभी क्षेत्रों के मज़दूरों ने राजनीतिक दलों से 14 से ज़्यादा माँगों को उनके घोषणा पत्र में शामिल करने की माँग रखी। साथ ही माँग रखी गयी कि, भारतीय जनता पार्टी ने 2013 में जो घोषणा पत्र पेश किया था उसकी पालना रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाए। सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने कहा कि , आज मनरेगा में लगातार काम कम होता जा रहा है, मनरेगा को धीमी मौत मारा जा रहा है। जहाँ पहले 25 लाख परिवार 100 दिन पूरा करते थे वह संख्या घटकर ढाई लाख ही रह गयी है। सरकार मनरेगा में न्यूनतम से भी कम मज़दूरी दे रही है।’ संवाद में निर्माण एवं जनरल मज़दूर यूनियन के हरकेश बुगलिया ने कहा कि, ‘जनता से टैक्स के रूप में पैसा जमा करने वाली सरकारें पूँजीपतियों के कल्याण के बारे में ही सोचती हैं, जबकि देश की अर्थव्यस्था को तो मज़दूर और किसान चलाते हैं। इसलिए देश में सभी मज़दूरों को अब एक होकर अपनी माँगों को उठाने का समय आ गया है।’

राजस्थान महिला कामगार यूनियन की बासना चक्रवर्ती ने कहा कि, ‘हम लोग जब भी शासन,प्रशासन और जिन घरों में हम काम करते हैं वो सभी हमारे साथ भेदभाव करते हैं और जब हम अपनी शिकायत लेकर थाने में जाते हैं तो वहाँ भी हमारे साथ उसी तरह का व्यवहार किया जाता है।’ संवाद में पारस बंजारा एवं रक्षिता स्वामी ने बताया कि, संनिर्माण कल्याण बोर्ड का उच्चतम न्यायालय द्वारा सामाजिक अंकेक्षण के निर्देश दिए जाने पर राजस्थान के उदयपुर ज़िले में सामाजिक अंकेक्षण किया गया जिसमें बड़े पैमाने पर दलाली और अनियमितताएँ पाई गयी। इसलिए पूरे राज्य में सामाजिक अंकेक्षण कराया जाना चाहिए।

धरने में राजस्थान महिला कामगार यूनियन की बासना चक्रवर्ती, निर्माण एवं जनरल मज़दूर यूनियन के हरकेश बुगलिया, राजस्थान असंगठित मज़दूर यूनियन की नौरती बाई, राजस्थान मजदूर किसान मोर्चा के हनुमान सिंह, मज़दूर किसान शक्ति संगठन के बालू लाल, कचरा-कामगार यूनियन के दिनेश सपेरा, राष्ट्रीय हमाल पंचायत के प्रकाश कुमार, नैशनल होकर्स एसोसिएशन से मो. याकुब और बनवारी लाल शर्मा, मनरेगा मज़दूर और अन्य सामाजिक संगठनों के 200 से ज़्यादा घरेलू और मनरेगा मज़दूरों ने धरने में हिस्सा लिया। इसके अलावा सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे, PUCL की कविता श्रीवास्तव, आरडी व्यास, जाग्रत महिला संगठन बारां की महिला कार्यकर्ता जसोदा बाई, शकुंतला, भगवान दे, मोहनी, बैजंती सहित विभिन्न कार्यकर्ता मौजूद थे। धरने के अंत में शहीद स्मारक के चारों तरफ़ चुनाव जागरुकता रैली निकाल कर जनता से वास्तविक मुद्दों पर वोट देने की अपील की।

असंगठित क्षेत्र के कामगारों ने ये प्रस्ताव पारित किए गए :

ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार गारण्टी की तर्ज पर शहरी रोजगार गारण्टी कानून बनाया जाए। मज़दूरों के लिए मज़दूरी निर्धारण आयोग बनाया जाए जिसमें मज़दूरों का उचित प्रतिनिधित्व हो। 2013 में बीजेपी के जारी किए घोषणा पत्र की पालना रिपोर्ट जनता के सामने पेश करे भारतीय जनता पार्टी। सामाजिक सुरक्षा सहित सभी योजनाओं में आधार कार्ड की अनिवार्यता ख़त्म की जाए। सामाजिक अंकेक्षण को सीएजी की गाइडलाइंस के साथ लागू किया जाए, इसके लिए अलग से निदेशालय बने। शिक़ायत निवारण की व्यापक प्रक्रिया बने। सामाजिक अंकेक्षण की रिपोर्ट को ऑनलाइन अपलोड किया जाए। न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 में वर्णित उचित मजदूरी सभी ग्रामीण एवं शहरी मजदूरों को दी जाए। न्यूनतम मजदूरी कम से कम 500 रुपए प्रतिदिन हो। वर्ष में दो बार सरकारी कर्मचारियों/अधिकारियों की तरह मजदूरी को महंगाई के साथ जोड़ा जाए। न्यूनतम मजदूरी की गणना करने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए। सरकारी कर्मचारियों/अधिकारियों की तरह प्रत्येक मजदूर को आवास की सुविधा दी जाए। आवास नीति बने व किराया एक्ट लागू हो। हर मजदूर को 55 वर्ष की उम्र के पश्चात न्यूनतम मजदूरी की आधी पेंशन दी जाये। सभी श्रम कानूनों को लागू करने के लिए श्रम विभाग में नई भर्तियां की जाए और आधारभूत ढांचा विकसित किया जाए। श्रम विभाग सहित सभी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने हेतु प्रभावी कदम उठाये जावे।घरेलू कामगार महिलाओं के कल्याण के लिए सशक्त नीति बनाई जाए।

रविवार को जन निगरानी अभियान में युवा, बेरोज़गारी, चुनावी वादे और घोषणा पत्र के बारे में संवाद किया जाएगा और इनकी समस्याओं को राजनीतिक दलों से उनके घोषणा पत्र में शामिल करने की माँग की जाएगी।

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