एकल विहारी संत व शिथिलाचार सामाजिक शीर्ष संस्थायें इस पर निर्णय लें

जयपुर, 14 जुलाई। जैन पत्रकार महासंघ (रजि.) के तत्वावधान में 11 जुलाई 2020 शनिवार को ’’आज के परिप्रेक्ष्य में जैन पत्रकारों की भूमिका एवं एकल विहारी संतों से हुई स्थिति पर राष्ट्रीय स्तर पर जूम एप पर’’ रमेश जैन तिजारिया राष्ट्रीय अध्यक्ष जैन पत्रकार महासंघ की अध्यक्षता में परिचर्चा रखी गयी।

महासंघ के महामंत्री उदयभान जैन, जयपुर ने सर्वप्रथम परिचर्चा में उपस्थित वक्ताओं एवं विभिन्न पत्रिकाओं से जुडे़ हुए सम्पादक, पत्रकार एवं संस्थाओं के पदाधिकारियों का अभिनन्दन, स्वागत किया तत्पश्चात्् डा0 मनीषा जैन युवा विदुषि प्राकृत साहित्य लांडनू ने मंगला चरण से इस परिचर्चा का शुभारम्भ किया।
परिचर्चा का कुशल संचालन करते हुए डा0 अनिल जैन, जयपुर वरिष्ठ उपाध्यक्ष जैन पत्रकार महासंघ एवं वरिष्ठ लेखक ने बताया कि यह परिचर्चा गत 21 जून को हुई राष्ट्रीय वेबीनार की श्रृखंला में रखी गई है।
डा0 चिरंजी लाल बगड़ा कलकत्ता वरिष्ठ पत्रकार दिशाबोध पत्रिका के प्रधान सम्पादक ने कहा कि पत्रकारों को पंथवाद और संतवाद से दूर रहना चाहिए, पत्रकारों को स्वाध्यायी, समर्पित, स्वतन्त्र चिंतक और स्वावलम्बी होना चाहिए। उन्होंने मुनि शिथिलाचार के क्रम में कहा कि प्रथम स्तर पर ही समाज को रोकने की दिशा में ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। प्रदीप जैन सम्पादक दैनिक विश्व परिवार रायपुर ने कहा कि पत्रकारिता विचार प्रधान होनी चाहिए। पत्रकार साधुओं के स्थितिकरण और धर्म की प्रभावना के लिए लिखें।
जैन मनीषी राजेन्द्र महावीर सनावद ने कहा कि पत्रकारों का महत्वपूर्ण कार्य समाज/जैन संस्कृति की सूचनाओं को सही एवं निष्पक्ष प्राकाशित करना हैै। एकल विहारी जैन साधुओं/एवं संतों की शिथिलाचार के बारे में समाज की शीर्ष संस्थाओं को निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि परम पूज्य आचार्यों को मूलाचार और भगवती आराधना जैसे ग्रन्थों का मुनि दीक्षा से पूर्व ज्ञान कराना चाहिए।
वरिष्ठ पत्रकार स्वदेश भूषण जैन दिल्ली ने कहा कि पत्रकार लोकतन्त्र का चौथा स्तम्भ है, पत्रकार वो व्यक्तित्व होेता है जिसकी आवाज और लेखन में ताकत हो, उन्होंने कहा कि जैन पत्रकार महासंघ को शक्तिशाली बनाना

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होगा, समाज संगठित हो तो साधुओं में शिथिलाचार पर अंकुश लग सकता है।
प्रखर वक्ता वरिष्ठ पत्रकार एडवोकेट अनूप चन्द जैन फिरोजाबाद ने कहा कि पूर्वाग्रह मुक्त पत्रकारिता हो, जनजागरण की आवश्यकता है श्रमण संस्कृति की सुरक्षा मुुनियों के हाथों में है उनके आहार, विहार, निहार की समुचित व्यवस्था समाज करें जिसके लिए पत्रकारों को सजग होने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पत्रकार महासंघ का नियमित समाचार पत्र होना चाहिए।
डा0 सुनील जैन संचय स्वतन्त्र लेखक ललितपुर ने कहा कि साधुओं से जैन धर्म की पहिचान है, उन्होंने यह भी कहा कि मुनि मंच से राजनैतिक व अन्धविश्वास की बात न कहंे, पत्रकारों को ऐसे समाचार भी प्रकाशित नहीं करने चाहिए। परिचर्चा में संजय बड़जात्यिा कॉमा, डा0 फागुन मन्या भावनगर गुजरात, दर्शन मांगिया, पारस जैन कोटा, सतीश जैन सुलतानपुर महाराष्ट्र ने भी अपने विचार रखें।
परिचर्चा में आस्ट्रेलिया से पी.के जैन, प्रो0 टीकमचन्द जैन दिल्ली, डा0 शरद जैन दिल्ली, प्रकाश पाटनी भीलवाड़ा, दिलीप जैन जयपुर, महेन्द्र बैराठी जयपुर, मनीष शास्त्री शाहगढ़, सतेन्द्र कुमार जैन, ज्योति पाटनी नागपुर, शरद जैन लांडनू आदि पत्रकार एवं विभिन्न संस्थाओं के सैकडों पदाधिकारी जुड़े।
उदयभान जैन महामंत्री ने सभी ऑनलाइन पत्रकार बन्धुओं से अनुरोध किया की शीघ्र निर्धारित फार्म भरकर सदस्यता ग्रहण करें ताकि महासंघ शक्तिवान बन सकें।
महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश जैन तिजारिया ने अपने अध्यक्षीय उद््बोधन में कहा कि संगठन को मजबूत किया जायेगा संभाग व जिलास्तर पर सर्म्पक किया जायेगा, नियमित त्रैमासिक पत्रिका का प्रकाशन किया जायेगा उन्होंने कहा कि वरिष्ठ पत्रकारों की एक समिति का गठन कर गाइडलाइन के अनुसार समाज/मुनि संघों से सर्म्पक कर मुनियों के आहार, विहार व आवास पर समुचित कार्य करेगी।
अध्यक्ष महोदय ने कहा कि आज देश-विदेश के जैन वरिष्ठ पत्रकार, संस्थाओं के पदाधिकारी जुड़े, सभी ने प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में सहयोग प्रदान किया उन सभी का आभार व्यक्त किया गया।

(उदयभान जैन)
महामंत्री

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