राजस्थान के पहले आईएएस अधिकारी जिनका कार्यालय बंद चेम्बर नहीं खुला जनता दरबार है

फरियादी सीधे मिलते है संभागीय आयुक्त से ,

चंदन सिंह भाटी
जैसलमेर राजस्थान में पहला मौका है जब संभाग मुख्यालय पर वरिष्ठ आईएएस
संभागीय आयुक्त बन्द चेम्बर में नही खुले दरबार मे बैठकर जनता के दुख
दर्द सुनते है और उनका समाधान करते है।।संभागिय आयुक्त अपनी रोजमर्रा की
सरकारी बैठके भी खुले दरबार मे करते है।।ऐसी पारदर्षिता और सहज उपलब्धता
किसी आईएएस अधिकारी की नहीं रही।

जोधपुर संभाग मुख्यालय पर संभागीय आयुक्त का कार्यालय जिला कलेक्टर
कार्यालय के समीप है। पहले संभागीय आयुक्त का बन्द चेम्बर था। जहां आम
आदमी का पहुंचना आसान न था।मगर जब संभागीय आयुक्त पद पर लीजेंड आईएएस डॉ
समित शर्मा की नियुक्ति हुई।।व्यवस्थाओं में बदलाव शुरू हुआ।डॉ समित
शर्मा ने लक्ष्य रखा सरकारी कारिंदों के लिए ईमानदारी से अपना काम करे
।इसी तर्ज पर उन्होंने अपने दायरे में आने वाले छह जिलो के वाशिन्दों की
सहूलियत के लिए पारदर्शिता को मुख्य आधार बनाया।।संभागीय आयुक्त में जिलो
के दौरे जिस अंदाज और तेवर में किये उससे जिला स्तरीय प्रशासनिक अम्लों
में सुधार का असर दिखने लगा है।।आमजन के लिए सहज उपलब्ध होने के लिए
उन्होंने चेम्बर सिस्टम बदल दिया।।उन्होंने अपने चेम्बर को जनता दरबार की
तर्ज पर विकसित किया। एक दम खुला चेम्बर ।बाहर से आसानी से कोई भी
संभागीय आयुक्त को काम करते देख सकते है।।यही बैठकर अपनी रोजमर्रा की
सरकारी बैठके लेते है।।यही पर आम जनता से उनकी समस्याएं सुनते है और उनका
समाधान हाथों हाथ करने का प्रयास करते है।।कोई भी व्यक्ति संभागीय आयुक्त
के जनता दरबार से खाली हाथ नही लौटता ।।फरियादी का काम होता है या उसे
पूर्ण संतुष्ट करके भेजा जाता है।।

फरियादी सीधे मिलते है संभागीय आयुक्त से ,*
फरियादी अब सीधे संभागीय आयुक्त तक अपनी समस्याएं लेकर पहुंच रहे है।उनकी
समस्याओं का समाधान भी हो रहा। अब तक संभागीय आयुक्त पद मोहर जैसा ही था
जिसका कोई औचित्य नही था।आमजनता को संभागीय आयुक्त से कोई सरोकार नही था
मगर डॉ समित शर्मा ने इस धारणा को न केवल बदला अपितु संभागीय आयुक्त पद
को आमजनता और सरकारी कारिंदों के बीच असरकारक बनाया।।उनके विभिन्न जिलों
के दौरे खासकर उनकी कार्यशैली आमजनता के दिलो को भा गई।।सरकारी कारिंदे
संभागीय आयुक्त से ख़ौफ़ खाने लगे।।सरकारी काम मे अब सुधार दिखने लगा है।।

जनता की सहूलियत के लिए खुला चैंबर
संभागीय आयुक्त डॉ समित शर्मा से खास मुलाकात में बताया कि क्यों उन्हें
जनता दरबार की जरूरत महसूस हुई।।डॉ शर्मा के अनुसार उनके क्षेत्राधिकार
में छह जिले आते है।।सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन सरकार की मंशा अनुरूप
नही हो रहा था।।आम जनता अपने दुख दर्द ,समस्याएं उचित माध्यम तक
पहुंचाने के लिए इधर उधर प्रयास करते थे।।सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम
व्यक्ति तक पहुंचे इसके लिए हमने नई शुरुआत कर बन्द चेम्बर में बैठने की
बजाय खुले और पारदर्शी स्थान पर बैठकर लोगों की फरियाद सुनने का निर्णय
लिया।।अब कोई भी अपनी समस्या लेकर सीधे संभागीय आयुक्त के पास आने लगे
है।।जहां उनकी समस्याओं का समाधान कर उन्हें राहत प्रदान की जा रही
है।बंद चैंबर में आमजन को अधिकारी तक पहुंचने में दिकत होती थी ,हमने यह
दिकत स्थायी रूप से खत्म कर दी अब खुले चैंबर में बाहर आने वाला हर
व्यक्ति नजर आता हैं ,।

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