
विधायक अजमेर उत्तर एवं पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि कांग्रेस के असंतुष्ट कार्यकर्ता जो बडे नेताओं के कपड़े फाड़ रहे है उन्हें शांत करने के लिए सरकार ने विधान सभा में नगर पालिका संशोधन विधेयक पेश कर मनोनित किये जाने वाले पार्षदों की संख्या बढाने का प्रयास किया है। देवनानी ने शुक्रवार को विधान सभा में इस बिल का कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि पार्षदों की संख्या बढ़ाते वक्त यह ध्यान भी नहीं रखा कि कम संख्या वाले बोर्ड में कितने बढाने है तथा बडे बोर्ड में कितने बढाने है जबकि सभी में एक समान बढोतरी कर दी।
देवनानी ने कहा कि सत्ता पाने के लिए कांग्रेस कुछ भी कर सकती है। पहले जयपुर सहित प्रदेश की नगर निगमों को दो निगमों में बांटा गया। उसके बाद सभी नियमों को ताक पर रखकर वार्डो का परिसीमन किया गया। उसके बाद भी जब बोर्ड नहीं बना पाए तो लोकतंत्र का गला घोटते हुए जयपुर, पुष्कर में नियमानुसार बनाई गई समितियों को ही भंग कर दिया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सभी हदे पार कर दी है। जहां पर भाजपा का बोर्ड है वहां एसे अधिकारी लगाये जाते है जो बोर्ड द्वारा कराये जाने वाले जनहित के कामों में रूकावटें पैदा करते है। पुष्कर नगर पालिका के ईओ को दो बार हटाने के बाद वापिस वहीं लगा दिया।
उन्होंने कहा कि निकायों की आर्थिक स्थिति दयनीय है। जरूरी तो यह था कि सरकार कोई एसे कदम उठाती जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती। निकायों में निर्वाचित सदस्यों के लिए ही बैठने की पर्याप्त जगह नहीं है फिर बढाये गये सदस्यों को कहां बैठाएंगे। उन्होंने कहा कि संख्या बढाने के बाद निगमों व निकायों में बैठक के लिए स्थान भी नहीं है और बढाये गये मनोनयन के बाद स्थिति और कठिन हो जाएगी। निकायों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे बड़े सभागृह बनवा सके इसके लिए सरकार उन्हें विशेष अनुदान दे।