कोरोना बड़ा या “कचौरी”…..?

“बनाने” वालों से मंगाने वाले ज्यादा “गुनहगार”

सुशील चौहान
भीलवाड़ा। अब तक सुनते आए है कि “मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है”। यह तो सत्य है ही लेकिन कोरोना काल में रेड अलर्ट लॉक डाउन के बावजूद कोई “घर” से कचौरी, समोसे बनाकर बेच रहा है तो कोई “नमकीन की कढ़ाई” में “बेसन” तल रहा है और हद तो देखिए कि ज़ुबान ओर स्वाद पर काबू नहीं कर पा रहे लोग बड़ी शान से ऑर्डर कर रहे है और “चटखारे” लेकर लाँक डाउन को “ठेंगा” दिखा रहे है। यह सब देखकर तो कहने पर मजबूर होना पड़ता है कि बनाने वाले से ज्यादा मंगाने वाला बड़ा गुनाहगार है। चटोरे मंगवाए नहीं तो बनाने वाला किसको देगा ? लॉक डाउन के इस दौर में जब हर रोज़ लाशों की लाइन लग रही है इसमें प्रशासन इस मंशा से लोगों को घर से बाहर नहीं जाने दे रहा कि कल ये मंजर किसी ओर के घर में न हों। लेकिन हालात चिंता जनक ओर हास्यस्पद भी है। लोग घर बैठे कचौरी , समोसे , नमकीन ओर तो ओर पसंद की मिठाईयां घर पर मंगवा रहे है। उनके लिए लॉक डाउन “पिकनिक” जैसा है। कोरोना तो अपना रंग दिखा ही रहा हैं उस पर ब्लैक पंगस भी पूरी ताकत के साथ दस्तक दे रहा हैं। “मगर हम हैं के मानते ही नहीं” कभी कचौरी तो कभी समोसा मंगा रहे हैं। और दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर घर से लोगों की चटपटी जुबान का ध्यान रख कर अपना माल बेरोकटोक बेच रहे। और तो और शहर का प्रसिद्ध हलवाई अपने घर से लोगों के घरों में गुलाब जामुन व मक्खन बड़ा भी सिरका रहा हैं तो “गायत्री” का मंत्र जप कर अपनी नमकीन को “न्यू लुक” देकर पूरे लाँकडाउन को ठेंगा बता रहा हैं। इस महामारी के दौरान लोग आपना ,पत्नी, बच्चों का जन्मदिन मनाने के लिए केक मंगवाने से भी नहीं चुक रहे हैं।केक बनाने वाले भी “महालक्ष्मी” कूट रहे हैं,लेकिन अब प्रशासन सख्त है। ताली दोनों हाथों से बजती हैं यानी हम मंगाएंगे नहीं तो वो बनाएंगे किसके लिए।कोरोना की इंसिडेंट कमांडर और उपखंड अधिकारी ओम प्रभा जी गंभीर है। जनहित के मामला है तो सख्ती भी जायज़ है। कचौरी बनाने वालों को सबक भी सिखाया है तो संदेश यही गया है कि महामारी का समय है । “स्वाद पर संयम रखें”। आप नहीं मंगवाओगे तो कोई बनाएगा भी नहीं। इसलिए कहा गया है कि बनाने वाले से ज्यादा गुनाहगार मंगवाने वाले है।
-सुशील चौहान –
98293-03218
स्वतंत्र पत्रकार
पूर्व उप- सम्पादक, राजस्थान पत्रिका
वरिष्ठ उपाध्यक्ष, प्रेस क्लब, भीलवाड़ा
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