कोविड महामारी ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर डाला बुरा असर

ऽ मानसिक विकार भारत में बीमारी के बोझ का दूसरा प्रमुख कारण
ऽ वर्ष 2017 में भारत में 7 नागरिकों में से 1 अलग-अलग गंभीर मानसिक विकारों से था प्रभावित, कोविड के बाद इस अनुपात के और बिगड़ने की आशंका
ऽ 1140 मनोचिकित्सकों, परामर्शदाताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को कोविड संक्रमित लोगों, अकेले रहने वाले वृद्ध लोगों और बच्चों के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए किया गया प्रशिक्षित
ऽ मानसिक स्वास्थ्य के लिए कोविड से संबंधित समाचार देखना/पढ़ना बंद करें – यूनिवर्सिटी आॅफ मैनचेस्टर के प्रो. विमल शर्मा

भारत, 21 जुलाई, 2021- आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी ने “पब्लिक हैल्थ एण्ड वैलबींग डिस्कषन सीरीज़ः इषूज़, चैलेंजेस् एण्ड साॅल्यूषन एमिड कोविड” श्रृंखला के तहत “मेंटल हैल्थ – अ ग्लोबल पब्लिक हैल्थ चैलेंज” विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया। इस वेबिनार में लंदन यूनिवर्सिटी, मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी और आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के प्रख्यात वक्ताओं ने कोविड के दौरान मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित विविध पहुलओं की चर्चा की और लोगांे के बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य का मुकाबला करने के लिए रणनीति बनाने से जुड़े कार्य और विचार साझा किए। सेंट जॉर्ज यूनवर्सिटी आॅफ लंदन के मनोचिकित्सा के प्रोफेसर प्रो. मोहम्मद अबू सालेह, यूनिवर्सिटी आॅफ आॅफ मैनचेस्टर के प्रोफेसर- ग्लोबल मेंटल हेल्थ रिसर्च विमल शर्मा और आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन डॉ. एस डी गुप्ता ने इस वेबिनार में मुख्य वक्ता के तौर पर अपने विचार व्यक्त किए।

आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन डॉ. एस. डी. गुप्ता ने कहा, ‘‘मानसिक विकार भारत में बीमारी के बोझ का दूसरा प्रमुख कारण हंै और कोविड ने मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों के साथ मिलकर इस अनुपात को सबसे खराब बना दिया है। पहले लोग आजीविका के बारे में चिंतित थे, लेकिन लॉकडाउन, माइग्रेशन, नौकरी छूटने, परिवार के सदस्यों की मृत्यु, घर से काम करने, घरेलू हिंसा और अन्य हालात के कारण लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ा है। आज हमारे लिए भी यह अध्ययन का विषय है कि जो लोग पहले ही मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे, उन्होंने कोविड के दौरान मानसिक स्वास्थ्य देखभाल हासिल नहीं होने के बावजूद कैसे खुद को संभाला।’’

लैंसेट साइकियाट्री-2020 की रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में हर 7 में से 1 भारतीय अलग-अलग गंभीर मानसिक विकारों से प्रभावित था। भारत में मानसिक विकारों का कुल बीमारी बोझ में आनुपातिक योगदान 1990 के बाद से लगभग दोगुना हो गया है। विभिन्न मानसिक विकारों से जुड़े बोझ को लेकर राज्यों के बीच पर्याप्त भिन्नताएं मौजूद हैं। कोविड महामारी के साथ,
भारतीयों में मानसिक विकारों का यह अनुपात और बुरी तरह बिगड़ गया होगा। दरअसल, कोविड ने सभी देशों के सतत विकास लक्ष्यों को बाधित कर दिया है और अब हेल्थ मैनेजमेंट को प्राथमिकता मिलने लगी है, और इसमें मानसिक भलाई भी शामिल है।
सेंट जॉर्ज यूनवर्सिटी आॅफ लंदन के मनोचिकित्सा के प्रोफेसर प्रो. मोहम्मद अबू सालेह ने कहा, ‘‘कोविड महामारी 21वीं सदी की सबसे बड़ी चुनौती है। लेकिन मानव बुद्धि ने विज्ञान के सहारे ऐसी तरक्की कर ली है कि हम खुद को बचाने मंे कामयाब रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोविड डैशबोर्ड के अनुसार, जुलाई 2021 तक वैश्विक स्तर पर 182.3 मिलियन से अधिक पुष्ट मामले सामने आए हैं, जिनमें 3.9 मिलियन से अधिक मौतें शामिल हैं, और 28 जून 2021 तक, 2950.1 मिलियन से अधिक वैक्सीन की खुराक वितरित की जा चुकी है। इस पूरी अवांछित महामारी की घटना ने मानव जीवन को अचानक विभिन्न विनाशकारी कारकों के साथ बदल दिया है जैसे – सामाजिक-आर्थिक स्थिति में व्यापक बदलाव, आमदनी में कमी, बेरोजगारी, आय असमानता, कम शिक्षा, कम सामाजिक समर्थन, अपर्याप्त आवास, भीड़भाड़ और पड़ोस में हिंसा, प्राकृतिक आपदा और माइग्रेशन जैसे कारणों से हालात बहुत बदले हैं।’’
यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के ग्लोबल मेंटल हेल्थ रिसर्च के प्रोफेसर डॉ. विमल शर्मा ने कहा, ‘‘यह जरूरी है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए हमारी स्वास्थ्य प्रणाली को एक संपूर्ण मैनेजमेंट सिस्टम को विकसित करना होगा। रोगी की भावनात्मक जरूरतों को पूरा करके संकट का प्रबंधन ठीक किया जा सकता है। लोगों से जुड़ना और बात करना, योग और आध्यात्मिक तरीके, सक्रिय व्यायाम, अच्छी बातों पर ध्यान देना, कोविड से संबंधित समाचार देखने से बचना, तनाव पर जीत हासिल करना सीखते रहें। कुल मिलाकर हमारा सकारात्मक सोच ही संकट से निपटने में मदद कर सकता है।’’
कोविड 19 के बाद लगे झटकों के कारण निम्न-आय और मध्यम-आय वाले अनेक देशों ने अपने यहां कार्यरत स्वास्थ्य प्रणालियों को नए सिरे से मजबूत किया है। इनमें से कुछ देशों ने लोगांे के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव से निपटने की दिशा में भी तेजी से कदम उठाए हैं। भारत ने टोल-फ्री मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन शुरू की है, केरल राज्य सरकार ने एक विशिष्ट टीम की स्थापना करके जबरदस्त प्रयास किए हैं, 1140 मनोचिकित्सकों, परामर्शदाताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को कोविड संक्रमित लोगों, अकेले रहने वाले वृद्ध लोगों और बच्चों के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इसी क्रम में क्वारेंटीन मंे रहने वाले 1.3 मिलियन लोगों से संपर्क किया गया और 0.5 मिलियन से अधिक रोगियों को पाक्षिक रूप से दवाएं वितरित की गईं।
सभी वक्ताओं ने मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन को लेकर सार्वजनिक स्वास्थ्य पेशेवरों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया, क्योंकि मनोचिकित्सकों की कमी है।
आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेंट डाॅ पी आर सोडानी ने वक्ताओं का स्वागत किया। वेबिनार को मॉडरेट किया गया डॉ विनोद कुमार एसवी, डीन और प्रोफेसर, एसडीजी एसपीएच- आईआईएचएमआर विश्वविद्यालय। इस वेबिनार में स्वास्थ्य क्षेत्र के 300 से अधिक विशेषज्ञों और भारत, भूटान, चीन, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों के छात्रों ने भाग लिया।

Leave a Comment

This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

error: Content is protected !!