प्रदेश में बेरोजगारी का विकराल रूप-देवनानी

प्रो. वासुदेव देवनानी
जयपुर, 14 सितम्बर।
भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व शिक्षा मंत्री एवं अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी ने मंगलवार को विधानसभा में प्रदेश के बेरोजगारों की पीडा को सदन के सामने रखा। प्रदेश में बढती बेरोजगारी को लेकर लगाए स्थगन प्रस्ताव पर बोलते हुए देवनानी ने कहा कि राज्य में बेरोजगारी विकराल रूप लिए हुए है। कांग्रेस ने युवाओं के साथ धोखा किया है। युवा अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। कांग्रेस ने चुनावों में युवाओं को रोजगार के स्वप्न दिखाते हुए 5 लाख को रोजगार देने का वादा किया लेकिन 35 माह बाद भी परिणाम ढाक के तीन पात रहे। तीन बजट में पिछले दो साल के लिए की घोषणा में 1.78 लाख को नियुक्तियाॅ देने की घोषणा की लेकिन पौने तीन साल में केवल 42 हजार को नियुक्तियाॅ दे पाए।
देवनानी ने कहा कि बेरोजगारी को लेकर सेंटर फाॅर माॅनीटरिंग इंडियन इकोनाॅमी (सीएमआईई) के आंकडे चैकाने वाले हैं। बेरोजगारी के मामले में राज्य देश में दूसरे पायदान पर है। केन्द्र से तीन गुना ज्यादा बेरोजगार आज यहाॅ है। देश में अप्रेल माह में बेरोजगारी दर 7.13 प्रति. थी जबकि प्रदेश की बेरोजगारी दर 27.6 प्रतिशत थी। राजस्थान से यूपी बडा प्रदेश है फिर भी उसकी बेरोजगारी दर मात्र 6.9 प्रतिशत है। यह राज्य के लिए गंभीर विषय है लेकिन सरकार और राज्य के मुखिया का इस पर कोई ध्यान नहीं है। मुख्यमंत्री तो केवल केन्द्र, मोदी और राष्ट्रवादी सामाजिक संगठन संघ को कोसने में व्यस्त है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वादा किया था कि वे रोजगार नहीं दे पाए तो बेरोजगारी भत्ता देंगे। घोषणा पत्र के पेज नंबर 15 बिंदू नं.10 में पुरूषों को 3,000 और महिलाओं को 3,500 देने का वादा किया। विभागीय पोर्टल पर 14,29,886 पंजीकृत हुए जिसमें 12 लाख स्नातक है जबकि भत्ता केवल 1.6 लाख दे रहे है अब 2 लाख को देने की घोषणा और की है। जिस गति से राज्य में बेरोजगारों को भत्ता देने का कार्य हो रहा है उसमें तो सबको देने में 12 साल लग जाएंगे। तब तक दो सरकारों का कार्यकाल पूरा हो जाएगा फिर भी इन बेरोजगारों को भत्ता नहीं मिल सकेगा। इसमें तीस प्रति.लोग ओवरेज हो जाएंगे।
राजस्थान लोकसेवा आयोग बना कांग्रेस लोकसेवा आयोग
देवनानी ने कहा कि यूपीएससी कभी विवादों में नहीं रहती लेकिन आरपीएससी सदा विवादों से घीरी रहती है। आरएएस परीक्षा 2018 के दौरान राज.लोकसेवा आयोग उच्च पदस्थ राजनीतिज्ञों को उपकृत करने का चारागाह बनकर रह गया। राज.लोकसेवा आयोग को आज कांग्रेस लोकसेवा आयोग कहा जाए तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। पहले दाल में कुछ काला होने की बात करते थे लेकिन यहाॅ तो पूरी दाल ही काली है। मुख्यमंत्री और उसकी टीम की ये कैसी जादूगरी है कि आरएएस परीक्षा 2018 के दौरान एक ही परिवार के तीन सदस्यों के साक्षात्कार में 80-80 अंक आए जो ऐसा आज तक के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। पुत्रवधु, पुत्रवधु का भाई और पुत्रवधु की बहिन तीनों के लिखित परीक्षा में 45-47 प्रति. जबकि साक्षात्कार में अस्सी-अस्सी नम्बर देने की जो प्रक्रिया हुई उससे मुझे लगता है कि राजस्थान लोकसेवा आयोग को कांग्रेस लोकसेवा आयोग बना दिया गया। इसके बाद तो साक्षात्कार की पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।
परीक्षार्थी ढूॅढ रहे हैं नाथी का बाढा
देवनानी ने कहा कि सीकर में आरपीएससी में चयन के लिए बेरोजगार ‘नाथी के बाडे’ की तलाश में है। आरपीएससी परीक्षा में 87 केन्द्र बनाए गए थे जिसमें से केवल 7 केन्द्रों से ही 200 में से 77 परीक्षार्थी चयनित हुए। उत्तर पुस्तिकाएं एक वर्ष तो बिना जाॅचे रखी रही और फिर एक मुश्त जॅचवाई गई तो वह भी वहाॅ जहाॅ के कुलपति रिश्वत के आरोप में पकडे गए हो। ये वे ही कुलपति है जिन्होंने जोधपुर में 32 अनियमित लोगों की नियुक्ति कराई थी। भ्रष्ट लोगों के बीच काॅपियों की जाॅच कराने से पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में है। माॅडल आंसर-की नहीं बनाई जाती है जो देशभर में बनाई जाती है। आॅन स्क्रेनिंग मार्कर पद्धति के साथ कम्प्यूटर में छोडछाड व त्रुटि सुधारने का कार्य किया जाता होगा। यहाॅ तक की डीओपी रूल 15 में हमेशा 15 गुना करते हैं जबकि इसमें 30 गुना दिए गए ताकि राजनीतिज्ञों के संबंधि भी आ सके। इस प्रकार आरएलडीसी में घूस काण्ड हुआ जिसमें मैनजर और कोर्डिनेटर गिरफ्तार हुए और दो आईएएस के दफ्तर सील हुए है। प्रदेश में इस प्रकार की स्थिति बनी हुई है कि पेपर लगने से पहले बाजार में आ जाते हैं।
परीक्षा शुल्क लौटाए सरकार
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने परीक्षा शुल्क लौटाने की घोषणा की थी। 19 लाख बेरोजगारों के 46 करोड रूपए अटके हुए है। 10 हजार भर्तियाॅ अटकी हुई है। सरकार ने बेरोजगारों से वादा किया था कि सभी रिक्त पद भरे जाएंगे जो लाखों की संख्या में खाली पडे हैं। सरकार ने संविधाकर्मियों को नियमित करने का वादा किया था जो पूरा नहीं किया है। कोरोना काल में निजी कम्पनियों में कर्मचारियों की छटनियां की है जिसको लेकर सरकार आॅखें मूंदी बैठी है। सरकार से माॅग करूंगा कि सरकार बेरोजगारों को रोजगार एवं बेरोजगारी भत्ता देने के साथ आरपीएससी चयन प्रक्रिया में बदलाव करें। इसके अतिरिक्त नियुक्तियाॅ गैर राजनीतिक हो।

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