प्रशासन गांव के संग अभियान केवल खानापूर्ति बनकर रह गया है – दिलावर

कोटा 27 अक्टूबर। भाजपा प्रदेश महामंत्री एवं रामगंजमण्डी विधायक मदन दिलावर ने बडौदियाकलां गांव मंे सरकार द्वारा लगाये गये प्रशासन गांव के संग शिविर में पहुंच कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। दिलावर प्रत्येक विभाग के काउन्टर पर पहंुचे और उन्होने शिविर के दौरान किये गये कार्याे की सम्बन्धित अधिकारी से जानकारी ली। इसके उपरान्त दिलावर शिविर में पहुंचे ग्रामीणजनों से मिले और उनकी समस्याओं को ध्यान से सुनकर सम्बन्धित अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिये। इस अवसर पर दिलावर ने मौजूद अधिकारियों को कहा कि इस शिविर की सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब हम सब लोग मिलकर उस गरीब, असहाय, पीडित व वंचितों को सरकार द्वारा चलाई जा रही जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दे पायेंगे। इसके लिए पूरी इमानदारी के साथ हमंे काम करना पडेगा। आज भी गांवों के लोग ज्यादा पढे लिखे नहीं है वे यह भी नहीं समझते कि आवेदन अथवा प्रार्थना पत्र किस प्रकार तैयार किया जाता है और किसको कहां दिया जाता है, ऐसी स्थिति में हमें पूरा सहयोग कर उसको तत्पर्ता से न्याय दिलाने को प्रतिबद्ध होना पडेगा।
दिलावर ने कहा कि शिविर में राजस्व सम्बन्धी मामले ही अधिक आये है जिनमें से कई मामले आपसी समझाईश से दूर किये जा सकते है। कई मामलों में अधिकारी टालमटोल करने की नियत से वे लम्बित कर देते है यह प्रवृति ठीक नहीं है। आज भी गावों में 50-100 वर्षाे पुराने पुस्तेनी मकानों के पट्टे उपलब्ध नहीं करवाये गये है जिनके लिए ग्रामीणजन विभाग के चक्कर लगा-लगा कर थक हार बैठ जाते है। जबकि ऐसे मामलों मंे पंचायत ही अधिकृत है। इसी प्रकार प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत कच्चे मकान अथवा आवासहीन परिवारों को पक्का मकान बनाने हेतु दी जाने वाली सहायता राशि से भी हजारो-हजारों पात्र परिवारों को वंचित रखा हुआ है जो उचित नहीं है। ऐसे सभी पात्र परिवारांे को चिन्हित कर उन्हे योजना का लाभ दिलावाने की एक कार्य योजना तैयार कर वर्ष 2022 से पूर्व ही लाभान्वित किया जावे। ताकि भारत सरकार की महत्वाकांशी योजना सफल हो सके।
दिलावर ने यह भी कहा कि मुख्य सचिव राजस्थान सरकार द्वारा प्रशासन गांव के संग अभियान के लिए जारी दिशा निर्देशों की पालना भी किसी विभाग द्वारा नहीं की गई है और इसी का परिणाम है कि इन शिविरों में ग्रामीणजन अपनी समस्याओं के समाधान के लिए धक्के खा रहे है और यह शिविर केवल खानापूर्ति बनकर रह गये है।

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