त्याग तप और ध्यान की साधना से तीर्थंकर पद की प्राप्ति – आचार्य

आचार्य गुरुवर का 32 उपवास के पश्चात महापारणा हुआ।
जयपुर । श्री दिगंबर जैन मंदिर वरुण पथ मानसरोवर में चल रहे चातुर्मास के अंतर्गत परम पूज्य आचार्य गुरुवर विवेक सागर जी महाराज ने उपस्थित बंधुओ को मंगल आशीर्वाद देते हुए कहा की शरीर की शुद्धि स्नान से मन की शुद्धि ध्यान से धन की शुद्धि दान से होती है यदि हमें अपने मन को शुद्ध करना है तो ध्यान की परम आवश्यकता है । दुनिया में तीर्थंकर जैसे महापुरुष हुए हमें तीर्थंकर तक पहुंचना है तो तप, ध्यान और त्याग की आवश्यकता है क्योंकि तीर्थंकर जब बने उन्हें भी इन्हीं चीजों की आवश्यकता पड़ी तभी वह अपने आप को कुंदकुंद बना पाए त्याग के साथ ही आप अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हो इस मोक्ष मार्ग में तप त्याग और ध्यान ही सही पते पर पहुंचाने के लिए काफी हैं । मन के अंदर कषाय रूपी विचारों को महसूस करते हो तो उसमें भी आपको शर्म महसूस होनी चाहिए । जैन धर्म को त्याग और तप के लिए प्रधानाभूत कहा है पसीने की दुर्गंध हमें पसंद नहीं है इस अपवित्र शरीर के साथ हमारी अनादि काल से दोस्ती रही है ।इस शरीर को पवित्र बनाने का एकमात्र साधन रत्नत्रय है यदि आपको रत्नत्रय का संग्रह करना हो तो तप, ध्यान और त्याग को प्राथमिकता देकर अपने जीवन को सार्थक और सफल बनाना होगा तभी आप कल्याण के मार्ग पर जा सकते हैं ।
समाज समिति के अध्यक्ष एमपी जैन ने बताया कि परम पूज्य आचार्य गुरुवर के लगातार निर्जल 32 उपवास के पश्चात आज भव्य और ऐतिहासिक महापारणा दिगंबर जैन समाज द्वारा करवाया गया मानसरोवर के इतिहास में इतनी बड़ी साधना पहली बार किसी आचार्य परमेष्टि ने की साधना के पश्चात महापारणा में जिस प्रकार से जन समुदाय उमड़ा ऐसा भाव विभोर कर देने वाला दृश्य सकल जैन समाज को गौरवान्वित कर गया हम सभी परम पूज्य गुरुदेव की इस महान साधना की अनुमोदना करते हैं ।
प्रचार संयोजक विनेश सोगानी ने बताया कि सर्वप्रथम परम पूज्य गुरुदेव की पूरे भक्ति भाव से पूजन करवाई गई पूजन में विभिन्न स्थानों से आए गुरुदेव के भक्तों ने पूर्ण विधि से संपूर्ण सामग्री के साथ पूजा अर्चना की इसके पश्चात धर्म सभा का मंगलाचरण के माध्यम से विधिवत शुभारंभ ऐलक श्री 105 वीप्रमाण सागर जी महाराज ने किया एवं भगवान महावीर स्वामी व तपस्वी सम्राट आचार्य रत्न सुमति सागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित करने का सौभाग्य सुशील, जय प्रकाश, गिरीश, महेश जैन छतरपुर प्रदीप जैन फरिया, राजेंद्र जैन कोटिया कोटा, धर्मेंद्र एवं भंवर लाल मालपुरा वालों को प्राप्त हुआ । परम पूज्य आचार्य गुरुवर विवेक सागर जी महाराज का पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य सुशील जैन, नीरा जैन, जय प्रकाश जैन, गिरीश जैन, कृष्णा जैन को एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य बाबूलाल एवं सुरेंद्र जैन को प्राप्त हुआ । इस अवसर पर मानसरोवर महिला मंडल द्वारा भी शास्त्र भेंट किया गया ।
सभी सम्माननीय अतिथियों का तिलक एवं माल्यार्पण कर एम पी जैन, कैलाश सेठी, पुष्पेंद्र जैन पचेवर, हेमेंद्र सेठी, विनेश सोगानी, बीरेश जैन टीटी, राजेंद्र सोनी, सुनील गोधा, विमल बाकलीवाल, दीपक पहाड़िया, सुशीला टोंग्या, शीला जैन, कृष्णा जैन, आशा सेठी, प्रीती सोगानी, सुनिता गोधा ने स्वागत किया।

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