काव्य संग्रह “शब्द न होते हताश” का लोकार्पण

जयपुर । प्रज्ञा श्रीवास्तव प्रज्ञांजलि के प्रथम काव्य संग्रह “शब्द न होते हताश” का लोकार्पण अक्षत कनोत स्टेट, आगरा रोड, कानोता के सभागार में आयोजित एक गरिमामय एवं सादगीपूर्ण समारोह में किया गया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि नवीन जैन (वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, राजस्थान सरकार) ने कवयित्री को शुभकामनाएँ देते हुए उनके रचनाकर्म की प्रशंसा करते हुए बधाई दी और वर्तमान समय में समाज में कविता की आवश्यकता और महत्व को स्वीकार किया। विशिष्ट अतिथि सुनील जैन डायरेक्टर (अक्षत ग्रुप) ने भी समाज में लगातार बढ़ते हुए विभिन्न प्रकार के वैचारिक प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए इस संबंध में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका को इंगित किया। वरिष्ठ लेखिका ज्ञानवती सक्सेना ने सुंदरम साहित्य संस्थान के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कवि नरेन्द्र भूषण जी द्वारा की गई पुस्तक की समीक्षा का वाचन किया।

इस अवसर पर सभागार में उपस्थित अतिथियों के समझ कवयित्री ने अपनी रचना प्रक्रिया पर बात करते हुए अपने पिता एवं हास्य व्यंग के सुपरिचित कवि एवं मंच संचालक रहे स्वर्गीय बंकट बिहारी ‘पागल’ जी की स्मृति को भी नमन किया और बताया कि कविता का बीज मंत्र उन्हें पिता से ही मिला था जिसे उनके ससुर जी स्वर्गीय विजय बहादुर श्रीवास्तव जी ने उपयुक्त वातावरण देकर फलने फूलने में अविस्मरणीय सहयोग दिया। अपने जीवनसाथी और दोनों बच्चों का आभार मानते हुए प्रज्ञा ने कहा कि इन्हीं लोगों ने मुझे मेरा ‘मी-टाईम’ देकर मेरी लेखनी को नई उड़ान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रज्ञा श्रीवास्तव ने अपनी कुछ कविताएँ भी साझा कीं और भरपूर तालियाँ बटोरीं।

कार्यक्रम का खूबसूरत और रससिक्त संचालन रोडियो एवं टीवी एंकर और लेखिका शिवानी जयपुर ने अपने चिर-परिचित अंदाज में किया और प्रशंसा पाई।image0.jpegइस अवसर पर श्रीवास्तव परिवार के सभी सदस्य उपस्थित थे और उन्होंने अतिथियों का अत्यंत स्नेहिल स्वागत सत्कार किया।

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