जयपुर। (अशोक लोढ़ा) विगत कुछ वर्षों से देशभर में जैन समाज के साथ जो घटनाक्रम घट रहे है उसे देखकर सम्पूर्ण जैन समाज पहले ही आक्रोशित है, जैन समाज श्री गिरनार तीर्थ, श्री सम्मेद शिखर तीर्थ, श्री पालीताणा तीर्थ सहित ऐसे दर्जनों तीर्थ है जिनके संरक्षण को लेकर स्थानीय सरकार से सुरक्षा मांग रहे है किंतु समाज की उपेक्षा की जा रही है, ठीक इसी तरह साधु-संतों के सुरक्षा का मामला है, कर्नाटक में दिगंबर जैन मुनि की निर्मम हत्या का मामला हो चाहे, सड़कों पर पद विहार करते दिगंबर और श्वेतांबर जैन संतो का मामला हो आए दिन सड़क दुर्घटनाओं के मामले सामने आते है, जिसमें अनेकों साधु और साध्वियों की मृत्यु हो जाती है या यह कहें की षडयंत्र के साथ हत्या कर दी जाती है, उनके सुरक्षा की मांग की जा रही है किंतु यहां भी समाज को उपेक्षा झेलनी पड़ रही है और अब राजनीति ने भी समाज को उपेक्षा झेलनी पड़ रही है, पहले उपेक्षा सरकारों द्वारा की जा रही थी और अब राजनीतिक दलों द्वारा जैन उम्मीदवारों को उचित प्रतिनिधित्व ना देकर उपेक्षा की जा रही है। इस उपेक्षा का सकल जैन समाज लगातार विरोध कर रहा है और आगे भी करता रहेगा। अब जैन समाज केवल सर्वाधिक टैक्स चुकाने, सर्वाधिक दान देने तक सीमित नहीं रहेगा और ना ही किसी राजनीतिक दल से अब भीख मांगेगा, समाज अपना अधिकार लेना जानता है वह लेकर रहेगा और हर मोर्चे पर राजनीतिक दलों को सबक सिखाएगा।