*रोज दौड़ते हजारों यमदूत, कई मौतों के बाद भी निष्क्रिय सरकारी सिस्टम, आखिर सरकार क्यों मौतों को लगा रही है, गले*
संवाददाता जितेन्द्र गौड़
लाखेरी – उपखंड क्षेत्र में पापड़ी स्थित रेल्वे ओवरब्रिज जनसुविधा हेतु बनाया गया परन्तु अब यह जानलेवा साबित हो रहा है। इसके प्रति प्रशासन गहरी नींद में सो रहा है, जनप्रतिनिधि समस्या को जानकर भी अनजान बने हुए हैं,जो आमजन के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।
कोटा लालसोट मेगा हाईवे पर स्थित पापड़ी फाटक रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) अब विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि चलती-फिरती मौत बन चुका है। करोड़ों रुपये की लागत से बन रहा यह पुल किसी भी पल जानलेवा हादसे को न्योता दे रहा है, लेकिन प्रशासन की आंखों पर अब भी लापरवाही की पट्टी बंधी हुई है। पुल पर जगह-जगह नुकीले लोहे के सरिये बाहर निकले हुए हैं, गिट्टी उखड़ चुकी है और अधूरे ढांचे पर भारी ट्रक, डंपर और बसें बेधड़क दौड़ रही हैं। यह कोई साधारण निर्माण खामी नहीं बल्कि खुली मौत की साजिश है।
*हादसा नहीं चेतावनी थी, अगला नंबर किसका*
हाल ही में एक बाइक सवार खुले सरिये से टकराकर गंभीर रूप से घायल हो चुका है। यह हादसा नहीं था, यह प्रशासन के लिए आखिरी चेतावनी थी। लेकिन न निर्माण एजेंसी जागी न जिम्मेदार अफसर। सवाल सीधा है क्या प्रशासन किसी लाश का इंतज़ार कर रहा है
घटिया निर्माण भ्रष्टाचार मौत का पुल अधूरा निर्माण, कमजोर ढांचा और सुरक्षा मानकों की खुली धज्जियां सब कुछ नंगी आंखों से दिख रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है। यह आरओबी अब घटिया निर्माण भ्रष्टाचार और अफसरशाही की संवेदनहीनता का जीता जागता सबूत बन गया है।
*एक्सप्रेस वे के वाहन बन रहे हैं, यमदूत*
कोटा दौसा मेगा पर संचालित एक्सप्रेस वे के वाहन यमदूत बन कर दिन रात दौड़ रहे हैं। जिसके कारण पिछले दिनों में कई हादसे हो गए, जिनमें कई लोगों की मौत भी हो चुकी, फिर भी प्रशासन लापरवाही बरत रहा है। एक्सप्रेस वे के वाहनों से स्थानीय लोग डरे हुए हैं। राहगीर कांपते हाथों से पुल पार कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन को जैसे मौत की आहट भी सुनाई नहीं दे रही।
सरपंच संघ अध्यक्ष बुद्धि प्रकाश मीणा ने बताया कि इस खतरनाक स्थिति को लेकर कई बार विभाग को अवगत कराया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि पूर्व में घाट का बराना निवासी पति-पत्नी की जान भी जा चुकी है, फिर भी सिस्टम नहीं जागा। जब इस मामले में सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो फोन तक रिसीव नहीं किया गया। सवाल उठता है क्या जवाबदेही से बचने की कोशिश हो रही है? जनता की दो टूक मांग है कि आरओबी पर भारी वाहनों पर तुरंत रोक लगाई जाए एवं निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच करवाकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएं। आखिरी सवाल अगर इस पुल से अगली लाश उठती है, तो जिम्मेदार कौन होगा। आखिर कब रेल्वे ओवरब्रिज अपनी स्थिति में आएगा। आखिर करीब एक वर्ष में ही ओवरब्रिज इतनी खस्ताहाल कैसे हो गया, क्या पुल बनाने में घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया, जबकि बनने के बाद भी इसकी दो तीन मरम्मत की जा चुकी है। आखिर स्थानीय प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन कब जागेगा।