भीलवाड़ा | 28 जून 2026 (रविवार)
रविवार को भीलवाड़ा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के अंतर्गत पोलियो बूथों का सफल आयोजन किया गया। इसी क्रम में पूर्वांचल जनचेतना समिति (चैरिटेबल ट्रस्ट) एवम मणि एजुकेशनल सोसायटी भीलवाड़ा (राज.) द्वारा संचालित बूथ नंबर 129A पर सेवा, समर्पण और नवाचार का अनूठा संगम देखने को मिला।
पूर्वांचल ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष रजनीश वर्मा ने बताएं की समिति द्वारा आयोजित इस विशेष बूथ पर 150 से अधिक बच्चों को पोलियो की जीवनरक्षक दो बूंदें पिलाई गईं। उन्होंने कहा की सामाजिक संस्थाएं अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाएं और सरकारी कार्यक्रमों में अपना सहयोग सदैव प्रदान करें। लेकिन यह बूथ केवल पल्स पोलियो ड्रॉप्स तक ही सीमित नहीं रहा। बच्चों को उत्साहित और खुशहाल माहौल देने के उद्देश्य से यहाँ आकर्षक गिफ्ट्स, स्टेशनरी उपहार, मनोरंजक खेल गतिविधियाँ (गेम एक्टिविटीज़) और बच्चों के लिए विशेष आकर्षण भी आयोजित किए गए।
इन गतिविधियों ने बच्चों में उत्साह का संचार किया। बच्चे पूरे जोश और मुस्कान के साथ खेलों में शामिल हुए तथा खुशी-खुशी पोलियो की खुराक ग्रहण की। अभिभावकों ने भी इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार का वातावरण बच्चों के मन से झिझक दूर करता है और उन्हें स्वास्थ्य अभियानों से सहजता से जोड़ता है।
इस सेवा कार्य की संयोजक अनुराधा झा, शिल्पी सिंह, अजय आचार्य,लीला कन्नौज,आयुष सिंह एवं रिशु गुप्ता ने पूरे समर्पण और जिम्मेदारी के साथ अपनी सेवाएँ दीं। टीम ने बच्चों और अभिभावकों का आत्मीय स्वागत किया तथा अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पूर्वांचल जनचेतना समिति (चैरिटेबल ट्रस्ट) ने बताया कि संस्था का उद्देश्य केवल बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाना ही नहीं, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित, आनंददायक और प्रेरणादायक वातावरण उपलब्ध कराना भी है, ताकि प्रत्येक बच्चा बिना किसी भय या झिझक के इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य अभियान का हिस्सा बने।
समिति ने सभी अभिभावकों से अपील की कि 5 वर्ष तक का कोई भी बच्चा पोलियो की दो बूंदों से वंचित न रहे, क्योंकि यही दो बूंदें बच्चों को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।
बूथ नंबर 129A पर सेवा, स्नेह और रचनात्मक गतिविधियों के साथ आयोजित यह अभियान न केवल बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लेकर आया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि यदि जनस्वास्थ्य अभियानों को संवेदनशीलता और नवाचार के साथ संचालित किया जाए, तो उनकी सफलता और जनभागीदारी दोनों कई गुना बढ़ जाती हैं।