जयपुर, 4 अगस्त 2026: आज अधिकांश लोगों के दिन की शुरुआत मोबाइल फोन देखने से होती है और अंत लैपटॉप स्क्रीन के सामने। घंटों तक डेस्क पर बैठे रहना, गलत पोश्चर, शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ता स्क्रीन टाइम आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा बन चुके हैं। ये आदतें भले ही सामान्य और नुकसानरहित लगें, लेकिन हमारी हड्डियों और जोड़ों पर लगातार बढ़ता दबाव डाल रही हैं। ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ अब युवा प्रोफेशनल्स, छात्रों और यहां तक कि किशोरों में भी गर्दन और कमर दर्द तथा शुरुआती जोड़ों की समस्याएं देख रहे हैं, जो पहले अधिकतर उम्रदराज लोगों में देखने को मिलती थीं।
राष्ट्रीय बोन एवं जॉइंट दिवस के अवसर पर डॉ. दिलीप मेहता, एडिशनल डायरेक्टर – ऑर्थोपेडिक्स, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर ने कहा, “हमारी जीवनशैली हमारे शरीर के अनुकूल होने की क्षमता से कहीं अधिक तेजी से बदली है। लगातार घंटों तक बैठे रहना, वर्कस्टेशन का गलत एर्गोनॉमिक्स, व्यायाम की कमी और लगातार मोबाइल फोन की ओर गर्दन झुकाकर देखना रीढ़ और जोड़ों पर अनावश्यक दबाव डाल रहे हैं। अच्छी बात यह है कि अपनी दिनचर्या में कुछ सरल बदलाव करके इनमें से कई समस्याओं से बचा जा सकता है।”
आधुनिक जीवनशैली हड्डियों और जोड़ों के स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित कर रही है?
लंबे समय तक बैठे रहने से रीढ़ को सहारा देने वाली मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। लैपटॉप पर काम करते समय या स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हुए गलत पोश्चर गर्दन, कंधों और कमर के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ाता है। इसके साथ मोटापा, कैल्शियम और विटामिन डी का अपर्याप्त सेवन तथा नियमित व्यायाम की कमी लंबे समय तक रहने वाले दर्द और जोड़ों में क्षय का खतरा बढ़ा सकती है।
किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
बार-बार होने वाला गर्दन या कमर दर्द, लंबे समय तक बैठने के बाद अकड़न, कंधों में परेशानी, सीढ़ियां चढ़ते समय घुटनों में दर्द, हाथ-पैरों में सुन्नपन, जोड़ों में सूजन और लचीलेपन में कमी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि ये लक्षण लगातार बने रहते हैं, तो लंबे समय तक होने वाले नुकसान से बचने के लिए चिकित्सकीय जांच आवश्यक है।
किन लोगों को अधिक जोखिम है?
ऑफिस में काम करने वाले प्रोफेशनल्स, IT कर्मचारी, छात्र, ड्राइवर, स्मार्टफोन का अधिक इस्तेमाल करने वाले लोग, अधिक वजन वाले व्यक्ति, वरिष्ठ नागरिक तथा कैल्शियम या विटामिन D की कमी वाले लोगों में हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याएं होने की संभावना अधिक रहती है।
अपनी हड्डियों और जोड़ों को कैसे सुरक्षित रखें?
काम के दौरान हर 30–45 मिनट में थोड़ी देर टहलें या स्ट्रेचिंग करें।
सही पोश्चर में बैठें और कंप्यूटर स्क्रीन को आंखों के स्तर पर रखें।
मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते समय लंबे समय तक गर्दन झुकाकर न रखें।
कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर संतुलित आहार लें, पर्याप्त विटामिन डी का स्तर बनाए रखें और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।
लगातार बने रहने वाले दर्द या अकड़न को नजरअंदाज न करें। ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से समय पर परामर्श लेने से जटिलताओं को रोकने और सक्रिय जीवनशैली बनाए रखने में मदद मिल सकती है।