‘साधो! सबद साधना कीजे’ कार्यक्रम में हुआ पुस्तकों का विमोचन
जयपुर। शब्द ब्रह्म है और इसकी सत्ता हर जगह है। शब्द की साधना निरंतर और उपयोग संयमित रूप से करना चाहिए। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शारदा कृष्ण ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यह विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शब्द साधना एक तरह का ज्ञान यज्ञ है और इस यज्ञ में स्वाध्याय ही सबसे बड़ा तप है।
राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति के सभागार में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में अमरनाथ ‘अमर’ और भीम प्रकाश शर्मा ने ही कहा कि दूरदर्शन और आकाशवाणी के माध्यम से जन-जन तक साहित्य पहुंचा है। इन प्रसार माध्यमों ने समाज में साहित्य के प्रति चेतना जाग्रत की है। वरिष्ठ पत्रकार महेश चंद्र शर्मा ने कहा कि साहित्य और पत्रकारिता में समय सीमा, संवेदनशीलता और अलंकृत भाषा का ही अंतर है।
सभी अतिथियों ने पुस्तक विमोचन सत्र में लेफ्टिनेंट जनरल दलीप सिंह राठौड़ की पुस्तक ‘प्रतिरोध’, उषा राजश्री राठौड़ की ‘सोनचिड़ी’ और डॉ. इंदु झुनझुनवाला की ‘भला शब्दों में क्या रखा है’ का विमोचन किया।
लेफ्टिनेंट जनरल दलीप सिंह राठौड़ ने अपनी पुस्तक के बारे में बताया कि इसमें औरंगज़ेब के समय स्वामीभक्त वीर दुर्गादास राठौड़ के साथ राजपूतों, मराठों और सिखों के सफल प्रतिरोध का उल्लेख किया गया है। उषा राजश्री राठौड़ ने ‘पर मरना मत’ सहित अन्य कविताओं का पाठ किया। डॉ. इंदु झुनझुनवाला ने सुनील शास्त्री के साथ अपनी बातचीत और महिला विमर्श को पुस्तक का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
कार्यक्रम के दौरान नाटक का मंचन और छंदमुक्त कविताओं का पाठ किया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध व्यंग्यकार एवं नाटककार अशोक राही, विनोद जोशी, राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति के अध्यक्ष राजेंद्र बोड़ा, कल्याण सिंह शेखावत, राव शिवपाल सिंह, फारुख आफरीदी सहित साहित्यकार एवं पत्रकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सुमन द्विवेदी ने किया।
ग्रासरूट मीडिया फाउंडेशन के प्रमोद शर्मा ने बताया कि रविवार को सुबह ‘भाषा में लालित्य तत्त्व’ सहित अन्य प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय संस्था, राजस्थान फोरम और ग्रासरूट मीडिया फाउंडेशन के द्वारा राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति के सहयोग से किया गया है।