अरुण जेटली की नजर जयपुर संसदीय सीट पर

ARUN JATELY 2013-2-11जयपुर । भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं की नजर अब राजस्थान पर है। ये नेता यहां से चुनाव लड़ने के साथ ही प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होना चाहते है। इनमें एक हैं दिग्गज नेता अरुण जेटली और दूसरे है भाजपा के राष्ट्रीय सचिव भूपेन्द्र यादव। इनमें राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता अरुण जेटली की नजर जयपुर संसदीय सीट पर है। माना जा रहा है कि जेटली आगामी लोकसभा का चुनाव जयपुर से लड़ सकते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से उनके सुधरे सम्बन्धों से इसको और बल मिल रहा है।

राज्य के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि भाजपा ने अपने बड़े नेताओं को लोकसभा का चुनाव लड़ाने का फैसला किया है। राज्यों में पार्टी एक ही नहीं बल्कि दो से तीन ऐसे नेता स्थापित करना चाहती है जो हर परिस्थिति के लिए तैयार रहें।

पार्टी के सभी दिग्गजों ने अपनी-अपनी सीट तलाशनी शुरू कर दी है। पिछले लोकसभा चुनाव में सुरक्षित सीट मानते हुए सुषमा स्वराज ने मध्य प्रदेश के विदिशा, राजनाथ सिंह ने गाजियाबाद से चुनाव लड़ा था। जेटली पिछला लोकसभा चुनाव भी जयपुर से लड़ना चाहते थे, लेकिन तब पार्टी का चुनाव प्रबंधन संभाल रहे जेटली को लालकृष्ण आडवाणी ने चुनाव लड़ने से रोक दिया था। उस समय जेटली के वसुंधरा राजे से सम्बन्ध ठीक नहीं थे, लेकिन पिछले तीन सालों में सम्बन्धों में सुधार हुआ और वसुंधरा को पिछले दिनों प्रदेश अध्यक्ष बनवाने में जेटली की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

अब बदली रणनीति के तहत जेटली को जयपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़ाए जाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

गौरतलब है कि जयपुर में ब्राह्मण मतों की संख्या अधिक होने से लंबे समय तक सीट भाजपा के खाते में रही। भाजपा के गिरधारी लाल भार्गव लगातार सात बार जीते। पिछले लोकसभा चुनाव में यह सीट कांग्रेस के खाते में गई। तीन बार से राज्यसभा सांसद रहे जेटली ने अब तक जनता के बीच सीधा चुनाव नहीं लड़ा है। वे सीधे दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ का चुनाव लड़कर जीते थे।

इधर भाजपा के राष्ट्रीय सचिव भूपेन्द्र यादव भी राजस्थान की राजनीति में सक्रिय होना चाहते है। अरुण जेटली और राजनाथ सिंह से निकटता के चलते पिछले वर्ष वे राजस्थान से राज्यसभा सांसद चुने गए, लेकिन उनकी मंशा हमेशा ही चुनाव लड़कर राजस्थान में सक्रिय रहने की रही। हरियाणा के मूल निवासी भूपेन्द्र यादव अजमेर में पढ़े है। लेकिन भाजपा संगठन में वे हमेशा ही दिल्ली में सक्रिय रहे। अब वसुंधरा राजे के प्रदेश अध्यक्ष बनने और मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट होने के बाद किसी ऐसे दूसरे नेता की पार्टी को भी तलाश है जो कि पूरा चुनाव अभियान संभाल सके। इसी लिहाज से उन्हें वसुंधरा राजे के साथ लगाया गया है। वे पिछले एक माह से राजस्थान में सक्रिय है। पार्टी और वे स्वयं यादव बाहुल्य अलवर संसदीय सीट अथवा अजमेर संसदीय सीट से अगला लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते है। अलवर हरियाणा के निकट होने के कारण उन्हें अधिक फायदा हो सकता है।

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