वास्तु नियमों का गलत आंकलन,गलत परिणाम

शैलेन्द्र माथुर
शैलेन्द्र माथुर
वास्तु की मूल अवधारणा के अनुसार मुख्य द्वार के सामने रास्ता/टी/ऊँचे पेड़ आदि के होने से अधिकांश लोगों को मैंने द्वार पर या बाउंड्रीवाल पर दर्पण लगाते देखा है,परंतु इसके दुष्परिणाम का आंकलन वो लोग नहीं कर पाते।हर किसी दिशा में दर्पण नहीं लगाया जाता है और ना ही हर टी पॉइंट पे द्वार गलत होता है।
बल्कि लाभ प्रदान करने वाले टी पॉइंट द्वार पर दर्पण लगा देने से उल्टे दुष्परिणाम भुगतने पड़ते है।अतः बिना जानकारी के दर्पण नहीं लगाना चाहिए।साथ ही ध्यान रहे की दर्पण को हर किसी दिशा में उल्टा नहीं रखना चाहिए अन्यथा दुर्घटना का कारण बन सकता है।अक्सर लोग छत की डिजाइन में पी. ओ. पी .के फूल बनवाते है और उसमें उत्तल दर्पण भी लगालेते है जो दिशा -दिशा पर अपना प्रभाव दिखाते है।मैंने अपने अनुभव में कई परिवारों को इस कारण दुखी व शारीरिक रूप से पीड़ित देखा है।
कई बार भवन को वास्तु अनुसार बनवा लेने के बावजूद भी कई परिवारों को संतुष्ठ नहीं देखा गया है,कारण है बिगाड़ा हुआ इंटीरिअर डिजाइन/सजावटी सामानों का गलत स्थापन/गलत रंगो का चयन /आसपास का कुप्रभाव /मोबाइल टावरों का दुष्प्रभाव/घर में गंदगी आदि।
दिखावे की इस दुनिया में डिजाइनर व आर्किटेक्ट अपनी डिजाइन से कोम्प्रोमाईज़ नहीं करते,इसप्रकार प्राकृतिक व पञ्च तत्वों के संतुलन से छेड़छाड़ कर बैठते है।फलतः कई भवनों में वास्तु का दुष्परिणाम भुगतना पड़ता है।

–शैलेन्द्र माथुर,अजमेर

error: Content is protected !!