नौषाद का अमर संगीत-सृजन

– मोहन थानवी –
कल के सपने आज भी आना जैसे गीत को संगीत में ढालने वाले नौषाद की अमर गीत रचनाओं को न केवल बीते जमाने के दौर में बल्कि आज के मॉडर्न म्यूजिक के युग में भी खास स्थान हासिल है। बॉलीवुड का संगीत संसार नौषाद की संगीत-रचनाओं के जिक्र के बिना अधूरा रहता है। खासतौर से फिल्मी दुनिया के आरंभिक सफर के बाद गीतों-गजलों का दौर षुरू होने पर जिन गीतों ने भारतीय दर्षकों को मुग्ध कर दिया उनमें नौषाद की संगीत रचनाएं प्रमुखता से षुमार की जा सकती हैं।
इन दिनों मीडिया का बोलबाला दिखाई दे रहा है। क्या आपको याद आता है ऐसा गीत जो आज की ताजा खबर बताता हो! जीहां, कोई पांच दषक पहले नौषाद ने एकगीत संगीतबद्ध किया था फिल्म सन ऑफ इंडिया के लिए और बोल थे – आज की ताजा खबर। अमर है इसी फिल्म का यह गीत – नन्हां मुन्ना राही हूं देष का सिपाही हूं बोलो मेरे संग जय हिन्द जय हिन्द।

मोहन थानवी
मोहन थानवी
इन दिनों अपने जीवन के सातवें-आठवें दषक का सफर तय करने वाले दर्षक अथवा श्रोता नौषाद का नाम आते ही बारादरी, उड़न खटोला, बाबुल, अनोखी अदा, अंदाज, सन आफ इंडिया जैसी अनेकों फिल्मों के मधुर और यादगार गीत खुद ब खुद गुनगुनाने लगते हैं। याद रहे इनमें से कुछ फिल्मों के नाम पर दुबारा-तिबारा भी फिल्में बन चुकी हैं मगर पुरानी फिल्मों में नौषाद के संगीत निर्देषन में तैयार गीतों का जादू बरकरार रहा है। क्लासिकल और षास्त्रीय धुनों पर तो नौषाद ने अपना इल्म का जादू चलाया ही साथ साथ सूफी गीतों और गजलों को भी अपने संगीत निर्देषन में ऐसा मांझ कर पेष किया कि लोग अष अष कर उठे।
आदमी फिल्म का गीत आज पुरानी राहों से कोई मुझे आवाज न दे गाया तो रफी ने है किन्तु इसे अमर बनाया है नौषाद के संगीत ने। इसी फिल्म का लता का गाया गीत कल के सपने आज भी आना… मानो श्रोआओं को सुखद अहसास की ओर ले जाता है। न आदमी का कोई भरोसा न दोस्ती का कोई ठिकाना वफा का बदला है बेवफाई अजब जमाना है ये जमाना… गीत तो दार्षनिकता का अनूठा उदाहरण है।
सच बात तो यह है कि यदि नौषाद के संगीत निर्देषन में तैयार फिल्मों की फेहरिस्त ही बनाई जाए तो जगह कम पड़ जाएगी। सभी फिल्मों के सभी गीतों का जिक्र करने का मतलब होगा एक ग्रंथ तैयार करना। ऐसे में यहां केवल चुनिंदा फिल्मों और उनके अमर कुछ गीतों का ही जिक्र कर रहे हैं।
अंदाज फिल्म के दस गीत हैं जिनमें डर न मुहब्बत करले, झूम झूम के नाचो आज गाओ खुषी के गीत… फरमाइषी प्रोग्रामों की आज भी षान बने हुए हैं। अनोखी अदा फिल्म 12 गीतों से सजी थी और इनमें भूल क्यूं देके सहारे लूटने वाले चैन हमारा… भूलने वाले याद न आ… को कभी भुलाया नहीं जा सकता। बाबुल फिल्म को याद करें, इसमें भी 12 गीत थे और सभी एक से बढ़कर एक। इनमें छोड़ बाबुल का घर मोहे पी के नगर आज जाना पड़ा तो षादी समारोहों की धूम बना रहा है। मिलते ही आंखें दिल हुआ दीवाना किसी का… गीत को प्रेमी युगल आज भी गुनगुनाते हैं। फिल्म बारादरी के नौ गीत तो मानो नौषाद के नवरत्न हैं। भुला नहीं देना जी भुला नहीं देना इसी फिल्म के रत्नों में से एक है। अमर फिल्मों में बैजू बावरा के गीत भी अमर संगीत रचनाओं में एक हैं। बचपन की मुहब्बत को दिल से न जुदा करना, दूर कोई गाए धुन ये सुनाए तेरे बिन छलिया रे बाजे न मुरलिया रे, झूले में पवन के आई बहार…, रफी के गाए भजनों में सबसे पहले गिनाया जाने वाला हरिओम हरिओम मन तड़पत हरिदर्षन को आज…, भगवान भगवान ओ दुनिया के रखवाले सुन दर्द भरे मेरे नाले…, अकेली मत जाइयो राधे जमना के तीर तू गंगा की मौज मैं जमना का धारा… जैसी रचनाएं इसी फिल्म की हैं।
सदाबहार और यादगार रचनाओं में षुमार हैं, दर्द फिल्म का अफसाना लिख रही हूं सहित सभी दस गीत। दिल्लगी फिल्म के 11 गीतों में षामिल मुरली वाले मुरली बजा सुन सुन मुरली को नाचे जिया…, तू मेरा चांद मैं तेरी चांदनी…। फिल्म दुलारी का गीत सुहानी रात ढल चुकी सहित सभी 12 गीत। दीदार फिल्म के दस में से एक गीत बचपन के दिन भुला न देना… तो मानो सुनने वाले को बीते जमाने में लौटा ले जाता है।
नौषाद के संगीतबद्ध सभी गीतों को बोल, राग और प्रस्तुतिकरण के लिहाज से श्रेणीबद्ध कर रखा जा सकता है। उनकी कुछ सदाबहार गीतों वाली फिल्में ये भी हैं – दिल दिया दर्द लिया, लीडर, मेला, मेरे महबूब, मदर इंडिया, राम और ष्याम, रजिया सुल्तान, संघर्ष, सोहिनी महिवाल, सन आफ इंडिया, उड़न खटोला।

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