
मथुरा व्रन्दावन में होली को कृष्ण और राधा के पवित्र प्रेम से जोड़ कर देखा जाता है | होली का दिन शुरू होते ही नंदगाँव के हुरियारों की टोलियाँ और कीर्तन मंडलियाँ बरसाने पहुँचने लगती हैं |‘कान्हा बरसाने में आई जइयो बुलाए गई राधा प्यारी’ ‘फाग खेलन आए हैं नटवर नंद किशोर’और‘उड़त गुलाल लाल भए बदरा’जैसे गीतों की मस्ती से पूरा माहौल झूम उठता है | इस दौरान भाँग-ठंढई का ख़ूब इंतज़ाम होता है | बरसाने में टेसू के फूलों के विशालकाय भगोने तैयार रहते हैं | दोपहर तक घमासान लठमार होली का समाँ बंध चुका होता है | मथुरा जिले की छाता तहसील में फालैन गांव का यह क्षेत्र भक्त प्रह्लाद का क्षेत्र कहलाता है और यहां पण्डा होलिका दहन के बाद अंगारों पर चलता है।
Dr J. K. Garg