
भगवान क्रष्ण ने बताया कि स्त्री पुरुष को निष्काम भाव से सात्विक करते हुए उन्हें प्रभु के श्री चरणों में समर्पित कर देना चाहिये इसी वजह से आदि काल से सनातन धर्म में सात्विक, राजसी और तामसी तामसी प्रवर्तीयों में से सुखी जीवन के लिये सात्त्विक प्रव्रत्ति को ही श्रेष्ट माना गया है, राजसी प्रवत्ति को भी त्याग ने को कहा गया है वहीं तामसी प्रवत्ति को निक्रष्ट एवं पूर्ण रूप से ताज्य माना गया है | तामसी आदतों का मतलब है कुसंस्कार यानि ईर्ष्या, क्रोध, झूठ, फरेब, अनाचार,दुर्भावना, अभिमान, असहिष्णुता,अविश्वास, धोखा आदि सारी आदते तामसी प्रवत्ति और तामसी गुण हैं | होलिका दहन का का वास्विकता में मतलब है जीवन के रोम रोम में से समस्त दुष्कर्मों और तामसी आदतों का जड से समूल नाश और दहन | आप की मजबूत इच्छा शक्ति आपको सारी बुराईयों से बचा सकती है | तामसी प्रवत्ति होली की दिव्य अग्नि में भस्म कर देना ही सच्चा ‘होलिका दहन’ है। होली खेलने की सार्थकता तभी होगी जब हम परमात्मा में श्रदा रखते हुए सात्विक विचार, सकारात्मकता,स्नेह, प्रेम, सोहार्द, सहिष्णुता,सह्रदयता और करुणा के रंग में अपनी अंतरात्मा को रँग लेगें |
यों तो होली का त्योहार वसंत पंचमी से ही आरंभ हो जाता है। उसी दिन पहली बार गुलाल उड़ाया जाता है। इस दिन से फाग और धमार का गाना प्रारंभ हो जाता है। खेतों में सरसों खिल उठती है। बाग-बगीचों में फूलों की आकर्षक छटा छा जाती है। पेड़-पौधे,पशु-पक्षी एवं सभी नर-नारी उल्लास से परिपूर्ण हो जाते हैं। खेतों में गेहूँ की बालियाँ इठलाने लगती हैं। किसानों का ह्रदय ख़ुशी से नाच उठता है। होली का पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है | यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन तक मनाया जाता है। इस वर्ष होलिका दहन 0 9मार्च 2020 को धूम धाम से मनाया जायगा |
डा. जे. के. गर्ग