dr. j k gargगुरु नानक देव के पिता का नाम मेहता कालू और माता का नाम तृप्ता देवी था | गुरु नानक बचपन से सांसारिक विषयों से उदासीन रहा करते थे | उनका अधिकाशं समय आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में व्यतीत होता था| गुरु नानकदेव महान सामाजिक सुधारक थे उन्होनें सिख धर्म कीस्थापना की थी | गुरु नानक जी का विवाह सन 1487 में माता सुलखनी सेहुआ. उनके दो पुत्र थे जिनका नाम श्रीचन्द और लक्ष्मीचन्द था | नानकदेवजी ने समाज में फैली कुरीतियों को खत्म करने के लिए अनेक यात्राएं की थी | गुरु नानक कहते थे कि ईश्वर एक है उसकी उपासना हिंदू मुसलमान दोनों के लिए हैं | मूर्तिपुजा, बहु देवोपासना को नानकजी अनावश्यक कहते थे हिंदु और मुसलमान दोनों पर इनके मत और दिल को छू लेनीवाली बातों का प्रभाव पड़ता था |
ऐसा कहा जाता है कि नानकदेव जी को उनकेपिता ने एक बार व्यापार करने के लिए 20 रुपये दिए और कहा “ इन 20 रुपये से सच्चा सौदा करके आओ”| नानक देव जी सौदा करने निकले. रास्ते में उन्हें साधु-संतों की मंडली मिली | नानकदेव जी साधु-संतों को 20 रुपये का भोजन करवा कर वापस लौट आए|पिताजी ने पूछा- क्या सौदा करके आए? उन्होंने कहा- ‘साधुओं को भोजन करवाया.यही तो सच्चा सौदा है | गुरु नानक जी का कहनाथा कि ईश्वर मनुष्य के दिल में बसता है, अगर हृदय में निर्दयता, नफरत, निंदा, क्रोध आदि विकार हैं तो ऐसे मैले हृदय में परमात्मा बैठने के लिए भी तैयार नहीं हो सकते हैं |