dr. j k gargरविदासजी मानने थे कि राम, कृष्ण,शिव, करीम, राघव आदि सब एक ही परमेश्वर के विविध नाम हैं। उन्होनें कहा “जो आदमी घमंड के बिना विनम्रता से काम करता है वो ही जीवन में सफल रहता है “, जैसे कि विशालकाय हाथी शक्कर के कणों को चुनने में असमर्थ रहता है जबकि लघु शरीर की चींटी इन कणों को सरलतापूर्वक चुन लेती है। इसी प्रकार अभिमान तथा बड़प्पन का भाव त्याग कर विनम्रतापूर्वक आचरण करने वाला मनुष्य ही ईश्वर का भक्त हो सकता है।
अनेकों लोग मानते हैं कि गुरु रविदास को अद्धभुत सिद्धिया प्राप्तह थीं। कुछ मान्यताओं के मुताबिक बचपन में एक बार उनके एक प्रिमय मित्र की मृत्युस हो गई थी। सब लोग इसका शोक मना रहे थे। लेकिन जैसे ही रविदासजी ने करुण हृदय से दोस्त् को पुकारा तो वह जीवित होकर उठ बैठा।