बदल रहा है चाल,चरित्र व चेहरा

ओम माथुर

ओम माथुर

भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा क्या बदल रहा है? हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष सुभा्ष बराला के पुत्र विकास बराला द्वारा एक IAS की पुत्री के साथ छेड़छाड़ व उसके अपहरण की कोशिश करने की घटना यह भी बताती है कि जब बाड़ ही खेत को खाने लगे, तो उस खेत का भगवान ही मालिक है ।
अब भाजपा ने भी साफ कह दिया है कि बराला इस्तीफा नहीं देंगे। और सीएम मनोहर खट्टर भी कह रहे हैं कि बेटे की करनी की सजा पिता को क्यों दी जाए। यानी सत्ता और संगठन दोनों खुलकर अपने अध्यक्ष और उसके आरोपी बेटे के समर्थन मे सामने आ गए हैं। ऐसे मे न्याय की उम्मीद कैसे की जाए? जिस रास्ते में लडकी का पीछा करने और छेड़छाड़ की वारदात हुई उस रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज अब गायब हैं। पुलिस ने विकास बराला के खिलाफ धाराएं भी ऐसी लगाई कि उसकी जमानत थाने में ही हो गई । यानी घटना के बाद से जब पुलिस को यह पता लगा कि विकास कौन है,उसे बचाने के पूरे इंतजाम कर लिए गए और आखिर में खुद पार्टी उसके पीछे खड़ी हो गई। सवाल यह है कि बेटी बचाओ बेटी पढाओ का नारा देने वाली पार्टी किसी की बेटी के साथ छेड़छाड़ करने के आरोपी को क्यों संरक्षण देने पर तुली हुई है ? क्यों भाजपा मिसाल कायम नहीं करती की तुरंत बराला को पद से हटाया जाए और उसके बाद इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और जो धाराएं इस मामले में लगनी चाहिए ,उस के तहत बेटे बराला पर कार्रवाई हो।
फिर आरोप कोई विपक्षी दल का नेता नहीं,बलिक खुद पीड़िता लगा रही है और पीड़ित लड़की भी कोई आम लड़की नहीं,एक आईएएस अधिकारी की पुत्री है। उसे और उसके पिता को इस बात का एहसास अच्छी तरह से होगा कि सत्तारूढ दल के अध्यक्ष के खिलाफ उनकी लड़ाई का अंजाम क्या हो सकता है। कभी खुद का चाल,चरित्र और चेहरा देश की दूसरी पार्टियों से अलग बताने वाली भाजपा का नया चेहरा क्या बराला जैसा है? क्या चाल सरेआम गुंडागर्दी करने वाले लोगों से कदमताल वाली हो गई है? और चरित्र भी क्या उन दूसरी पार्टियों जैसा हो गया हैं जिनके नेता ऐसी घटनाओं को युवाओं का जोश बताते हैं। अब तो खुद भाजपा के सांसद सैनी ने ही बराला से इस्तीफा मांग लिया है यानी पार्टी के नेता भी इस घटना से हरियाणा और देश में पार्टी की होने वाली फजीहत को समझ रहे हैं। फिर इस बात को आलाकमान क्यों नहीं समझ रहा? अगर सचमुच भाजपा महिलाओं का सम्मान करती है और अपने नारे को सार्थक करना चाहती है,तो उसे पिता बराला के खिलाफ कार्यवाही करने के साथ ही बेटे बराला पर कार्यवाही के लिए पुलिस को पूरी छूट देनी चाहिए।
अगर भाजपा ऐसा नहीं कर सकती है, तो उसके नेताओं को उपदेश देना बंद कर देना चाहिए। एक सवाल ये भी उठेगा कि जब देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा के अधिकारी की पुत्री कार मे चलने के बावजूद सुरक्षित नहीं है, तो उन लाखों बेटियों की सुरक्षा कैसे होगी, जो साधारण घरों से हैं और पुलिस को ऐसी घटनाओं की शिकायत करने से भी डरती है। कौन करेगा उनकी सुरक्षा? क्या केवल भाषाणों से ये संभव है?

ओम माथुर। अजमेर। 9351415379

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