शहर में फर्जी पत्रकारों की बाढ

सुमित कलसी
सुमित कलसी

अजमेर ज़िले में इन दिनों फर्जी ‘पत्रकार’ और ‘प्रेस’ लिखे गाड़ियों की भरमार हो गयी है| जहाँ भी जिस किसी चौक-चौराहे पर आप खडें हो जाएँ, जिधर भी आपकी नजर जाएगी 2-4 गाड़ी ऐसी दिख ही जाएगी जिसपर ‘प्रेस’ लिखा होता है| इस ‘विशेष सुविधा’ का लाभ लेने से सीमावर्ती क्षेत्रों के तथाकथित फर्जी पत्रकार कभी भी चुकते नहीं हैं| आम गाड़ियों की अपेक्षा इन्हें अक्सर मिलने वाले वरीयता के कारण ढेरों लोग अपने गाड़ियों पर ‘प्रेस’ अंकित करवा कर अपना रोब झारते नजर आ जाते हैं|। शहर में यह भी देखने में आया है कि जिन लोगों का प्रैस से दूर-दूर का भी कोई संबंध नहीं है वह भी अपने वाहनों पर प्रैस शब्द के छोटे बड़े स्टीकर लगा कर व फर्जी प्रैस के आईकार्ड आदि लेकर लोगों को लूटने का काम कर रहे हैं और साफ छवि व असली प्रैस से संबंध रखने वाले पत्रकारों आदि को बदनाम कर रहे हैं।

पुलिस व जनता की आंखों में धूल झोंककर लोगों को ठगने का काम भी शहर में धड़ल्ले से चल रहा है, जिस पर तुरन्त प्रभाव से नकेल लगना अति आवश्यक है। युवा पत्रकार नविन वैष्णव ने पिछले महीने अपने लेख में भी लिखा था कि “कुछ संस्थाए तो ऐसी है जो 1000 रुपये से 5000 हजार रुपये जमा करवाकर अपनी संस्थान का कार्ड भी बना देती है । इन फर्जी पत्रकारों ने विजिटिंग कार्ड भी छपवा रखे है। जो लोग पुलिस की चेकिंग के दोरान उनको प्रेस (मीडिया) की धोस भी दिखाते है। गाड़ी रोकने पर पुलिस से बदतमीजी करते है । इनमे से बहुत से पत्रकार है जो भूमाफिया और अपराधी है जिनपर न जाने कितने अपराधिक मुकदमे भी दर्ज है प्रेस मीडिया छपवा कर मीडिया को बदनाम कर रहे है |” खबर पढ़े ये फर्जी पत्रकार प्रशासन और पुलिस को धोखा देते हुए कई सारे असामाजिक कार्यों में भी लिप्त जैसे प्रतीत होते हैं|

अजमेर स्वामी न्यूज़ चैनल ने भी मामले में अप्रैल 2014 में पर न्यूज़ दिखाई थी जिसे Youtube पर भी शेयर किया गया था | फिर भी इन फर्जी पत्रकारों की दबंगई अभी तक बरकरार है | वीडियो देखे :– http://www.youtube.com/embed/WP0VpHbtzMw?t=1m56s

ये समस्या सिर्फ अजमेर शहर की नहीं बल्कि हर ज़िले और कसबे की है, सिरसा के वरिष्ठ संपादक ने इस विषय पर सुझाव दिया कि जिला पुलिस प्रशासन को इस ओर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है और जो वास्तव में पत्रकार हैं उसका जिला पुलिस प्रशासन की तरफ से वाहन का स्टीकर व पहचान पत्र जारी होने चाहिए और नकली पत्रकारों व नकली “प्रैस” लिखे वाहनों को पुलिस को तुरंत पकड़कर जप्त करना चाहिए और नकली पत्रकारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। खबर पढ़े

सरकारी हो या गैर-सरकारी, किसी भी विभाग में यह लोग इस कदर सूट-बूट में जाते हैं कि हर कोई इनके चंगुल में आसानी से फंस जाता है, और ये लोग इन्हें अपना शिकार बनाए बगैर नहीं छोड़ते है। जैसे ही काम बन जाता है ये लोग वहां से रफू-चक्कर हो जाते है, और गलती से भी दुबारा उस जगह से नहीं गुजरते। प्रेस लिखी गाडिय़ों को देखकर पुलिस भी इन लोगों को सैल्‍यूट मारती है और असली पत्रकार से उलझ जाती है, क्योंकि इनकी चमक-दमक को देखकर पुलिस कर्मचारी भी असली और नकली की पहचान करने में चूक कर जाता है। ये फर्जी पत्रकार दिखने में वीआईपी से कम नहीं लगते, इसी बात का फायदा उठाकर ये प्रशासन की आंखों में धूल झोंक रहे है।

उदहारण के तोर पर आप गोवेर्मेंट कॉलेज, दयानंद कॉलेज व् अन्य संस्थानों की पार्किंग में खड़े वाहनो को देख सकते आपको हर दूसरी तीसरी गाड़ी पर ‘प्रेस’ लिखा दिख जाएगा | शहर में आपको हेलमेट नहीं लगाना हो, गाड़ी के कागज ना हो, लाइसेंस न हो या कोई अन्य कारण हो, प्रेस लिखा लो कौन रोकेगा? और अगर रोका गया तो ये फ़र्ज़ी पत्रकार  बदतमीजी पर उत्तर आते है, पुलिस कर्मियों को भद्दी-भद्दी गालिया देते है और ऐसा दिखने की कोशिश करते है जैसा वो बहुत बड़े पत्रकार है और उनका फर्जी समाचार पत्र या चैनल उन्ही के भरोसे चल रहा है|

इनको सबसे शह देते है शहर में स्थिथ विभन्न नंबर प्लेट बनाने, या स्टीगर का कार्य करने वाले दुकानदार जो पैसो के लालच में बिना कोई सवाल करे या बिना आधिकारिक प्रमाण पत्र देखे किसी की गाड़ी पर प्रेस, मीडिया लिख देते है | अगर प्रशासन इनको इस विषय पर पाबंद करे तो इस समस्या पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है |

अजमेर शहर के सभी वरिष्ठ पत्रकारों, संपादको से अनुरोध करुगा कि प्रेस क्लब में इस मुद्दे पर गंभीरता से वार्ता की जाए और इन फ़र्ज़ी पत्रकारों के खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाये जाए जो भारत के चोथे सतम्भ की गरिमा को धूमिल कर रहे है|

Sumeet kalsey
+91-9784710100

1 thought on “शहर में फर्जी पत्रकारों की बाढ”

  1. धन्यवाद तेजवानी जी | हो सकता है आपके पोर्टल में ये लेख प्रकाशित होने के बाद प्रशाशन और वरिष्ठ पत्रकारों का ध्यान इस और जाए और वो इस समस्या का समाधान ढूंढे| हमने इस विषय में पुलिस अधीक्षक से भी बात की उन्होंने कहा की सख्ती कल से क्या में अभी से करवा देता हु, पर हर २-३ फ़ोन आप लोगो का ही होगा की मेरा आदमी है छोड़ दो| उन फर्जी पत्रकारों के पास भी आईडी कार्ड होते है चोहराहे पर खड़ा पुलिस कर्मी असली और नकली में फर्क कैसे करेगा|

    आपके पास अगर इस समस्या का कोई समाधान होतो ज़रूर बताइयेगा|

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