परिवर्तन के पीछे कारण क्या है

भारत सिंगल
भारत सिंगल

जबसे इस जगत की उत्पत्ति हुई है तभी से कर्म को मानव का धर्म माना गया है। हम सभी लोग कर्म करने में विष्वास करते हैं हम जीवन में सभी कर्म करते हैं। कर्म विहीन जीवन अपना अर्थ ही खो देता है।

समृद्ध परिवार में जन्म लेने में व्यक्ति का क्या कर्म़
अब प्रष्न यह है कि भाग्य या किस्मत क्या है। जब हम कर्म करते है तो कर्म के अनुरूप हमें प्रतिफल प्राप्त होता है। फिर भाग्य या किस्मत का क्या रोल है। भाग्य या किस्मत का अस्तित्व है या यह केवल एक मानवीय सोच है। यही विषय कालान्तर से चर्चा एवं बहस का बिन्दु रहा है। कर्म एवं भाग्य परस्पर एक दूसरे से सम्बन्धित हैं। आप अपने व्यवहारिक जीवन में देखेंगे कि कई बार कर्म एवं भाग्य साथ साथ चलते हैं एवं कई बार कर्म एवं भाग्य विपरीत दिषा में चलते हैं। इसी के परिणाम स्वरूप आप पायेंगे कि समाज में कुछ व्यक्तियों ने बहुत मेहनत की परन्तु उन्हें सफलता के वह आयाम प्राप्त नहीं हुए जो कि इतनी मेहनत के उपरांत मिलने चाहिए थे। जबकि इसके विपरीत आपने यह भी देखा होगा कि कुछ व्यक्तियों द्वारा सामान्य कर्म या मेहनत उनके द्वारा की गयी परन्तु उन्हें इसके प्रतिफल स्वरूप सफलता आषाओं से बहुत अधिक प्राप्त हुई। जो लोग आस्तिक है अर्थात जिनका मत है कि संसार में भगवान / ईष्वर उपस्थित है एवं वही परम पिता परमात्मा इस सम्पूर्ण जगत को चलाता है एवं इस सम्पूर्ण सृष्टि पर उसी का नियंत्रण है। वह इस बात में विष्वास करते हैं कि जीवन में जो भी अच्छा या बुरा घटित होता है वह उसके भाग्य या किस्मत में पहले से ही लिखा होता है। यदि हम यह माने तो कर्म का क्या महत्व है जब जीवन में वह घटित होना ही है तो कर्म का क्या रोल है। कर्म, प्रतिफल, भाग्य यह सब एक दूसरे से जुडे हुए है।

यदि आप धीरू भाई अम्बानी का उदाहरण लें तो पायेंगे कि धीरू भाई अम्बानी एक बहुत ही साधारण परिवार में पैदा हुए एवं अपने जीवन में संघर्ष एवं अति कठोर परिश्रम कर कर्मो एवं उत्तम भाग्य के सांम्जस्य से न केवल भारतवर्ष स्तर के बल्कि अन्तराष्ट्रीय स्तर के व्यवसायी बन गये। श्री अम्बानी के दो पुत्र हुए जो कि अपने जन्म से ही अत्यन्त समृद्धि एवं धन के मालिक बन गये अब प्रष्न यह उठता है कि उनके द्वारा तो कोई कर्म किये नहीं गये तो वह जन्मजात इतने धनवान कैसे बन गये। यह किस्मत या भाग्य का ही प्रभाव है।
आप देखेंगे कि जो बच्चे जुडवा पैदा हुए है वह एक ही नक्षत्र एवं ग्रहों में पैदा होते हैं परन्तु दोनों का जीवन अलग अलग होता है। उनका षरीर, सोच, षिक्षा एवं जीवन षैली सर्वथा भिन्न भिन्न होती है। उनमें से एक बहुत सफल एवं समृद्ध बन जाता है तो दूसरे का जीवन संघर्ष में ही बीत जाता है।
कुछ लोगों के लिए सफलता उनके द्वारा सीमित कर्मो या मेहनत के उपरांत ही कदम चूंमती है तो कुछ लोगों के लिए कडी मेहनत एवं परिश्रम के बाद में असफलता ही हाथ लगती है एवं उनका पूरा जीवन संघर्ष में ही बीतता है। तो यही कहा जा सकता है कुछ लोगों को सफलता भाग्य में ही लिखी होती है।
हमारे जीवन में अच्छा समय भी आता है एवं जीवन में बुरा समय भी आता है। यदि समय अच्छा है तो कम कर्म में परिणाम उत्तम मिलते हैं एवं जब समय बुरा आता है तो अधिक एवं कठोर कर्म करने के उपरांत भी प्रतिफल कम प्राप्त होता है। लेकिन यह अवष्य है कर्मो का फल मिलता अवष्य है। इसके विपरीत यदि आप यह माने कि मेरे भाग्य में लिखा होगा तो सफलता मिल जायेगी और कर्म ही न करें तो यह भी असम्भव है। कर्म एवं भाग्य एक दूसरे के पूरक हैं।

जीवन में कर्म और किस्मत में ज्योतिष की भूमिका
हॉं ज्योतिष इस संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है यदि आप अपने कर्मो को ज्योतिष जो कि एक सर्व स्वीकार्य विज्ञान है की मदद से सही समय पर एवं सही दिषा में सम्पादित करें तो निष्चित रूप से बेहतर प्रतिफल प्राप्त हो सकते हैं। ज्योतिष से आप अपने लिए अनुकूल क्षेत्र का चयन कर सकते हैं एवं यह भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं कि आपके लिए अनुकूल समय क्या है। यदि इन दोनों बिन्दुओं की जानकारी के अनुसार आप अपने कर्म करते हैं तो आपको बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।
सामान्यतः लोग यह कहते हुए मिल जायेंगे कि भाग्य का लिखा हुआ कभी नहीं मिटता है एवं अवष्य घटित होता है। यह सत्य है परन्तु ज्योतिष के माध्यम से जो विषमतायें एवं कठिनाईयों का हमें सामना करना है उसकी तीव्रता में निष्चित रूप से कमी लायी जा सकती है। दूसरी ओर ज्योतिष के माध्यम से सकारात्मकता की तीव्रता को भी बढाया जा सकता है। ताकि यह सन्तुलित होकर जीवन सही प्रकार चलता रहे।
हमारे साथ जो भी बुरा घटित होता है उसके लिए तो हम कुछ मेहनत नहीं करते फिर वह क्यों घटित हो जाता है। उदाहरण के लिए  यदि किसी व्यक्ति का एक्सीडेंट हो जाता है एवं जख्मी हो जाता है तो एक्सीडेंट एवं जख्मी होने के लिए तो कोई भी व्यक्ति कर्म नहीं करता है फिर कर्म के अभाव में एक्सीडंेट कैसे हो गया। ऐसा केवल ग्रहो की चाल के अनुसार होता है।

ज्योतिष की मदद से जीवन के बुरे समय के प्रभाव में कमी
यदि हम ज्योतिष विज्ञान की मदद से ग्रहों एवं नक्षत्रों की स्थिति का आंकलन कर अपने कर्म व्यवस्थित करते तो निष्चित रूप से एक्सीडेंट से बचाव सम्भव था यदि बचाव सम्भव न होता तो इसकी तीव्रता को तो अवष्य ही कम किया जा सकता था।
ऐसा नहीं है कि जो लोग भाग्यषाली हैं या जिनकी किस्मत अच्छी है उन्हें कठिनाइयों या विषम परिस्थितियों का सामना नहीं करना पडता। यह अवष्य है भाग्यषाली होने के कारण विषमताओं की तीव्रता बहुत कम होगी जो कि उनके जीवन को अधिक प्रभावित नहीं करती। इसकी दूसरी ओर जिनका भाग्य साथ नहीं दे रहा है वह तो पहले से ही संघर्षरत हैं उनके जीवन में प्रतिकूल समय आने पर इसकी तीव्रता और बढ जाती है जिससे जीवन में अत्यन्त कठिनाइयों का सामना करना पडता है। ऐसी परिस्थितियों में व्यक्ति को आवष्यकता है कि वह धैर्य रखें एवं ज्योतिष की सहायता से सुधारात्मक उपायों को करते हुए इसकी प्रतिकूलता की तीव्रता को कम करें। जिससे जीवन में अधिक कठिनाईयां न आयें।

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