तनाव : हसंना, मुस्कुराना भूल गये हम

बलराम हरलानी
बलराम हरलानी
आज हर व्यक्ति तनाव से ग्रस्ति है । तनाव इस कदर हावी हो गया है कि लोग हसंना-मुस्कुराना भूल गये हैं । बस एक मषीन बन कर रह गये हैं । तनाव घटने की बजाये समाज में बढता ही जा रहा है । इसके मुख्य कारण हैं – अनियत्रित महत्वकाक्षायें, अनावष्यक भय, स्वयं की गलतियां और एकाकीपन । अगर आप को अपना तनाव कम करना है तो आप मेरी सलाह मान कर देखें आप राहत का अनुभव करेगें । हसंना-मुस्कुराना दोबारा आप के जीवन में आजायेगा ।

अनियंत्रित महत्वकांक्षाओं को कम करें, देखा-देखी मत करें । हर परिवार व व्यक्ति की परिस्थिति अलग अलग होती है । प्रभावित होना अच्छा है पर प्रतिस्पर्धा करना गलत है । जो दुसरों ने किया वह आप भी करें यह जरूरी नहीं । क्या चाहते है आप – सोचें । अपनी सीमा व दायरा खुद बनाये । हर गाडी में रेस देना ठीक है पर उसमें ब्रेक का भी प्रावधान होता है। सही सतुलंन के लिऐ महत्वकाक्षाओं को नियंत्रित करना सीखें ।

दूसरा कारण है अनावष्यक भय । आजकल हम सभी अनावष्क भय से ग्रस्त है । पता नहीं क्या होगा – यही विचार हमारे दिमाग में चलता रहा है । सकारात्मक सोचें जो होगा अच्छा ही होगा । अनावष्यक तनाव को अपना स्थान मत बनाने दें । आप सुखी हो जायेगें । चितां चिता समान है। डरा हुआ व्यक्ति गलत मार्ग पर भी अग्रसर हो जाता है । निडर बनें भगवान आप के साथ है । बस आपको अपने अनावष्य भय से लडाई लडनी है । अगर आप कर पाये तो जीत आप की ही होगी ।

तीसरा कारण है स्वयं की गलतियां । आजकल हम सभी लापरवाह से हो गये है कार्य के परिणाम को सोचे समझे बिना ही कूद पडते हैं। आधुनिकता ही चमक में हम स्वयं ही गलतियां करते चलते हैं और फिर अनावष्यक तनाव को निमंत्रण दे देते हैं । फिर घर आया महमान आसानी से नहीं जाता यह बात आप भी जानते हैं । तनाव तनाव और तनाव यही स्थिति हो जाती है । यदि आप देख कर, परख कर कार्य करने लगें तो आप स्वंय की गलतियांे को कुछ हद कर कम कर पायेगें । कर के देंखें तनाव कम होने लगेगा ।

एकाकीपन भी एक कारण है तनाव का । जब से सयुक्त परिवार खत्म सा हुआ है व्यक्ति में एकाकीपन के कारण तनाव आ रहा है । नकारात्मक विचार एकेलेपन से अधिक आते हैं जब हम परिवार में, मित्रों में, समाज में होते हैं तो समय बहुत अच्छा कट जाता है । मनोंरजन होने से तनाव अपना स्थान नहीं बना पाता । सगंठन में ही ताकत है । साथ रहंे, मित्रों का साथ अपनाये, परिवार में समय व्यतित करें । एकाकीपन को अपनेे जीवन में मत आने दें । जब भी आप अपने आप को एकेला महसूस करें कुछ समाज, परिवार, पर्यावरण व देष की सेवा के कार्य करें व योजनाएं बनाएं। आप उनका नहीं वास्तव में अपना ही भला कर रहें हैं ।

मेरी सलाह है आप रोज़ कुछ देर के लिऐ ही सही पर – हंसा करीये, मुस्कुराया करीये ।

बलराम हरलानी
लेखक का परिचय – एक सफल व्यवसायी, कृषि उपज मंडी के डायरेक्टर, समाज सेवी, पूर्व छात्र सेंट ऐन्सलमस अजमेर ।

error: Content is protected !!