रेलवे बजट में बहुत सी चीजें ऐसी हैं जिसमें सिर्फ क्रेडिट लेने की कोशिश की हैं – जैसे यात्री किराया एवं मालभाड़ा किराया को यथावत रखना ;पर सच तो यह हैं कि पिछले नों महीनों से डीजल के लगातार भाव गिर रहे हैं रेलवे मंत्री जनता के सामने यह सच क्यों चुपा रहे हैं, कायदेसर तो यात्री किराया और मालभाड़ा किराया में कमी कर आम जनता इसका फायदा दिलाना चाहिए था।इसी प्रकार 1500 Km कोरिडोर की प्रक्रिया तो पूर्ववर्ती U.P.A. सरकार के कार्यकाल मे शुरू हो गई थी ।ऐसे ही जैसलमेर से भाभर रेलवे लाइन की मंजूरी लोकप्रिय पूर्व सांसद माननीय हरीश जी चौधरी की सकारात्मक सोच उनके द्वारा पूर्व में किये गए अथक प्रयासों का परिणाम हैं ,बाड़मेर -जैसलमेर में औद्योगिक विकास व सैन्य सेक्टर और पर्यटकों की वजह से कहीं गुणा यात्री भार बढ़ा हैं, सीमावर्ती बाड़मेर जिले के लिए जयपुर व दिल्ली से आने वाली रेलो का विस्तार बाड़मेर तक न करना यहाँ की जनता के साथ अन्याय की बात हैं।
रेलमंत्री ने कई ऐसे वादे किए हैं जो खुली आखो से सपने दिखाने के समान हैं कहीं घोषणाए ऐसी हैं जो 2020 तक उदेशित हैं जैसे कि रेल बजट 2016 -17 का ना होकर वर्ष 2020 का प्रतीत हो रहा है ।N.D.A.सरकार को विकास करने की मंशा ही नहीं हैं, 2020 तक जनता इन्हें विपक्ष में बैठा देगी ‘रेलवे के राजस्व पर सातवें वेतन का सीधा असर पड़ेगा रेलवे के लिए यह बड़ी चुनौती हैं “यह बजट पूरी तरह से अपारदर्शी हैं ।
हनुमान भील जिलाध्यक्ष S.T. विभाग कोंग्रेस बाड़मेर