बिजली निजी हाथों को देने का निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन

congress logoअजमेर 8 मार्च। शहर कांग्रेस अध्यक्ष विजय जैन ने कलेक्टर आरूषी मलिक को दो टूक शब्दों में कहा कि बिजली जैसी जन उपयोगी आवष्यक सेवा को निजी हाथो में सौंपना न्यायोचित नहीं है यदि 16 मार्च तक टेन्डर पर रोक नहीं लगी तो प्रषासन बड़े जन आंदोलन के लिऐ तैयार रहे। उन्होने आरोप लगाया कि सरकार के इस कदम से ऐसा प्रतीत होता है कि इस तरह के निर्णय करके राज्य सरकार राजस्थान को निजी उद्ययोगपतियों के हाथों गिरवी रखना चाहती है। कांग्रेस ने मांग रखी कि घाटे पर सरकार एक श्वेत पत्र जारी करे ताकि जनता घाटे के मूल भूत कारणों को समझ सके।
शहर कांग्रेस ने संगठन के अध्यक्ष विजय जैन के नेतृत्व में मंगलवार को अजमेर की बिजली आपूर्ती को निजी कम्पनी को सौंपे जाने की कवायद के विरोध की प्रथम कड़ी में जिला कलेक्ट्रेट पर सांकेतिक धरना दिया। तकरीबन दो घन्टे तक धरने पर बैठे कांग्रेसियों को सभी वरिष्ठ नेताओं ने संबोधित करते हुऐ सरकार को जमकर कोसा सभी वक्ताओं ने बिजली के निजीकरण का पुरजोर विरोध करते हुऐ इये वापस लेने पर जोर दिया।
धरने के बाद सभी काग्रेसजन सरकार विरोधी नारे लगाते हुऐ कलक्टर के कक्ष की ओर कूच किया तो कलक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर खड़े पुलिस कर्मियों ने कांग्रसी कार्यकर्ताओं को अन्दर जाने से रोका तो कांग्रेसियों और पुलिस में हल्की मष्क्कत हुई धक्कामुक्की के बीच कांग्रेसी सरकार के विरूद्ध नारे बाजी करते हुऐ अन्दर प्रवेष कर गऐ। कांग्रेसियों ने कलक्टर के चेम्बर के बाहर राजस्थान सरकार और स्थानीय मंत्रियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। शहर कांग्रेस अध्यक्ष विजय जैन के नेतृत्व में सभी वरिष्ठ कांग्रेस नेता कलेक्टर के माध्यम से सरकार को ज्ञापन देने गऐ जहां कलक्टर से मांग की गई कि बिजली के निजीकरण के लिऐ 16 मार्च को होने वाली टेन्डर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाऐ अन्यथा शहर कांग्रेस वृहद स्तर पर आंदोलन चलाऐगी सरकार के इस जन विरोधी फैसले पर कांग्रेस ने निर्णायक लड़ाई लड़ने की तैयारी कर ली है।
जिला कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में बताया गया कि अजमेर की जनता पंूजीपतियों के वित्तीय दोहन को लेकर भयाक्रान्त है विज्ञाप्ति ई टेण्डर के अनुसार बिजली की आपूर्ति, बिल वसूली एवं शिकायत निराकरण जैसी समस्त व्यवस्थायें पंूजीपतियों द्वारा संचालित निजी कम्पनियों को सौंप दिये जाने से बिजली जैसी आवष्यक सेवा चरमरा जायेगी क्योंकि निजी हित रखने वाली कम्पनी की रूचि केवल बिल वसूली में रहेगी एवं उसके द्वारा सूचारू आपूर्ति और षिकायत निराकरण जैसे पहलूओं की निष्चित रूप से उपेक्षा की जायेगी।
ज्ञापन में बताया गया कि राजस्थान के समस्त 33 जिलों में अजमेर की फरर्फोमेन्स एवं वित्तीय दक्षता सबसे बेहतरीन है यदि वित्तीय घाटे के परिपेक्ष्य से देखा जाये तो अजमेर सिटी वृत का वर्तमान बकाया केवल मात्र 10 करोड़ है जबकि अन्य वृत्तों जैसे नागौर वृत्त का बकाया 236 करोड़, उदयपुर वृत्त का बकाया 186 करोड़ तथा जयपुर वृत्त एवं भरतपुर वृत्त की बकाया राषि तो इनसे भी कही अधिक है। इसके बावजूद भी अपेक्षाकृत सूचारू संचालित वृत्त को निजी हाथों में सौंपने का फैसला अजमेर में भाजपा के एक केन्दीय मंत्री दो राज्य सरकार में मंत्री, राज्ससभा सांसद, विधानसभा सचिव नगर निगम महापौर सहित प्राधिकरण के अध्यक्ष होने के बावजूद कमजोर राजनीतिक नेतृत्व एवं इन नेताओं के अजमेर की जनता के प्रति उत्तरदायित्व की कमी के कारण अफसरों और सरकार ने अजमेर का नंबर पहले ले लिया है।
ज्ञापन मे सरकार को चैताया गया कि प्राईवेट कम्पनी को नये विद्युत कनेक्षन जारी करने का प्राधीकार भी टेण्डर अन्तर्गत दिया जाना प्रस्तावित है जो कम्पनी के हाथ में निर्धन, दूरस्त इलाकों में रहने वाले एवं गैर आबादी में रहने वाले नव विकसित कच्ची बस्तियों के लोगो के लिए विद्युत कनेक्षन से महरूम करने का एक प्रमुख औजार थमाया जा रहा है। निसन्देह निजी कम्पनी केवल वित्तीय लाभ देने वाले नये कनेक्षन ही प्रदान करेगी एवं जन उपयोगी दृष्टिकोण की उपेक्षा की जायेगी जिससे सरकार की घर-घर बिजली पहंुचाने की योजना, राजीव गांधी विद्युतिकरण योजना, दीनदयाल विद्युतिकरण योजना को गहरा आघात लगेगा। कांग्रेस ने सरकार पर आरोप जड़ते हुऐ आरोप लगाया कि सरकार द्वारा पूर्व निर्धारित मापदण्डो के अनुसार किसी भी कम्पनी को प्राईवेट कम्पनी द्वारा ठेके पर लेने हेतु पाॅच वर्ष के न्युनतम अनुभव की शर्त अन्तर्निहित की गई थी किन्तु कुछ कम्पनियों को टेण्डर प्रक्रिया में शामिल करने के अविधिक उद्देष्य से इस समयाअवधि को घटाकरण तीन वर्ष किया गया ताकि नेताओं की हितबद्ध कम्पनियों को इस लूट का लाभ पहंुचाया जा सके।
ज्ञापन मे इस तथ्य को प्रमुखता से उठाया गया कि जिस किसी कम्पनी को यह व्यवस्था सौंपी जायेगी उससे केवल दो माह की सिक्युरिटी राषि ली जायेगी जबकि उसे 240 माह का ठेका दिये जाने का प्रावधान है। इस प्रकार स्पष्ट है कि यह राजस्थान लोक उपापन में पारदर्षिता अधिनियम 2013 के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है उल्लघन इस बात का है कि अधिनियम अनर्तगत ठेके पर लेने वाली निजी कम्पनी को ठेके के दौरान वसूली जाने वली कुल रकम का 5 प्रतिषत अमानत राषी जमा करवानी चाहिये क्योंकि एक अनुमान के अनुसार इस निजी कम्पनी के द्वारा 20 वर्षो की ठेका अवधि में 10800 करोड़ रूपये से भी अधिक की वसूली की जायेगी जिसकी 5 प्रतिषत अमानत राषी 500 करोड़ होती है जबकि ठेका प्राप्त करने वाली कम्पनी से इस वसूली के विरूद्ध परफोरमेन्स बैंक गारन्टी 34 करोड़ रूपये जमा करवाया जाना प्रस्तावित किया गया है जो किसी बड़े भ्रष्टाचार का संकेत है।
धरने पर प्रदेष कांग्रेस के सचिव महेन्द्र सिंह रलावता, पूर्व विधायक श्री गोपाल बाहेती, राजकुमार जयपाल, कमल बाकोलिया, आरिफ हुसैन, अषोक बिन्दल, विजय नागौरा, सुकेष कांकरिया, गुलाम मुस्तुफा, भूपेन्द्र सिंह राठोड़, ललित भटनागर, मुजफ्फर भारती, कुलदीप कपूर, श्याम प्रजापति, प्रमिला कौषिक, नौरत गुर्जर, लोकेष शर्मा, इमरान सिद्दीकी, दिव्येन्र्द जादोन, सबा खान, शैलेन्द्र अग्रवाल, रषीद खान, महंेष पाराषर, बलराम शर्मा, प्रताप यादव, प्रेमराज सोलंकी, नरेष सत्यावना, अमोलक छाबड़ा, वैभव जैन,कमल, गंगवाल, विवेक पाराषर, सुनिल केन, चन्द्रषेखर काकू, कैलाष कौमल, द्रोपती कोली, रेखा पिंगोलिया, श्रवण टोनी, चंचल बैरवाल, चंदन सिंह, मनोज बैरवा, भरत धोलखेडि़या, सुनिल मोतियानी, मुख्तार अहमद नवाब, बिपिन बैसिल, अंकुर त्यागी, सुनिल चैधरी, निमेष चैहान, किर्ती वर्धन सिंह, छितरमल टेपण, सत्यनारायण डिडवानिया, यासिर चिष्ती, सर्वेष पारिक, नवीन भाटी, बाल मुकंद टांक, राकेष चैहान, समर धानका, रागिनी चर्तुवेदी, सुषमा राठोड़, दिनेष वासन, गंगा गुर्जर, महेन्द्र जोधा, दिनदयाल शर्मा, मुनीम तंबोली, मंजू सोनी, लक्ष्मी नायक, कामना मिश्रा, मधु चैधरी, सोनल मोर्य, रष्मी हिंगोरानी, मोहम्मद शाकिर, अजय तेन्गोर, दिनेष शर्मा, राजू ठोमरे, मनीष सेठी, राजनारायण आसोपा, कषिष बायला, महेन्द्र धानका, विजय सिंह गहलोत, जोगिन्दर दुआ, जसविन्दर दुआ, जुल्फिकार चिष्ती, नईम खान, राजकुमार पाडया, हाजी चांद खां सहित सैंकड़ों कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद थे संचालन उपाध्यक्ष कैलाष झालिवाल ने किया।

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