अजमेर 14 मई। शहर भा.ज.पा. अध्यक्ष तथा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान अजमेर के राज्य स्तरीय पंजीकृत प्रकाशक संघ के पूर्व अध्यक्ष अरविन्द यादव तथा महासचिव ओमप्रकाश ने बोर्ड की कक्षा 9 व 11 की पुस्तकों में प्रदेश व देश की गरिमा के अनुरूप पाठ्य सामग्री समल्लित किये जाने पर बोर्ड अध्यक्ष सहित शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी तथा मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे का आभार व्यक्त किया है।
प्रकाशक संघ ने कहा है कि अभी बोर्ड की आधी से अधिक पुस्तकें और आना बाकी है, बोर्ड की पुस्तकों में से किसी भी महापुरुष से संबंधित पाठ्य सामग्री नहीं हटाई है इसके बार-बार स्पष्टीकरण के बावजूद कांग्रेस पार्टी सहित वामपंथी सोच के तथाकथित बुद्धिजीवी अनावश्यक रूप से अनर्गल प्रलाप कर रहे है। देश व प्रदेश के इतिहास को लेकर प्रदेश के छात्र स्वाभिमान व गौरव की अनुभूति के साथ प्रेरणा लेते हुए अध्ययन कर सके इस सोच के साथ लागू किये गये पाठ्यक्रम की सराहना करते हुए प्रकाशक संघ ने कहा है कि यह आश्चर्य का विषय है कि जो कांग्रेस इस पर बेवजह हगांमा कर रही है उनके शासनकाल में एक नहीं अनेकों बार बोर्ड की पाठ्यपुस्तकों में छेड़छाड़ कर अनुचित बदलाव किये गये यहाँ तक कि कांग्रेस के शासन में मुख्य सिलेबस में अंकित पाठ्यक्रमों के अंशों को हटाने के लिए अलग से सरकूलर निकाले गये।
प्रकाशक संघ ने कहा कि उन्हें 1986 का वह काला वर्ष आज भी याद है जब राज्य में मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर के कार्यकाल के दौरान राजीव गांधी ने नई शिक्षानीति के नाम पर राज्य में बोर्ड के सभी प्रकाशकों द्वारा 1986 के शैक्षणिक वर्ष के लिए सभी पुस्तकें तैयार होने के बावजूद जबरन सभी विषयों में नया पाठ्यक्रम थोप दिया था, हिन्दी साहित्य की कक्षा 9 व 10 की गद्य पद्य संकलन सहित इतिहास व भूगोल व अन्य सभी पुस्तकों को पूर्णतया बिना किसी तैयार सिलेबस के आननफानन में बदल दिया था।
जबकि वर्ष 1986 के शैक्षणिक वर्ष के लिए लगभग 8 माह पूर्व ही बोर्ड ने तैयारिया कर राज्यभर में अपने पंजीकृत प्रकाशकों से निविदाएं आमंत्रित कर निर्धारित प्रक्रियानुसार उन्हें सभी पुस्तकें छापने व वितरण के निर्देश दे दिये थे और जब करोडों रूपयों की लागत से लाखों की संख्या में यह पुस्तकें छप कर प्रकाशकों के गोदामों में आ गयी तथा बोर्ड ने इनका भौतिक सत्यापन भी करा लिया कि अचानक स्व. राजीव गांधी की शिक्षा नीति के नाम पर बोर्ड ने एक ही आदेश में पूरे राजस्थान में तैयार इन पुस्तकों को रद्द कर दिया उस समय स्थानीय स्तर पर व प्रदेश भर में भारी विरोध के बावजूद भी कांग्रेस सरकार अपने छात्र विरोधी निर्णय पर अडिग रही।
बिना किसी ठोस आधार के कांग्रेस सरकार द्वारा लिए गये इस निर्णय से करोडों रुपयों की यह पुस्तकें रद्दी हो गयी तथा राज्य के सभी बोर्ड प्रकाशक बदहाली का शिकार होकर भारी कर्ज में डूब गये।
प्रकाशक संघ ने कहा कि कांग्रेस सरकार देश व प्रदेश में पाठ्यक्रमों के मौलिक स्वरूप के विरुद्ध अपनी मर्जी से आमूल चूल जबरन परिवर्तन करती रही है अब जब पाठ्यक्रम निर्माण सर्वहारी व शैक्षणिक वातावरण सही दिशा की और बढ़ रहा है, तो बिना सत्य जाने बेवजह हंगामा किया जा रहा है। इससे पूर्व कांग्रेस को अपने गिरेबान में झाक लेना चाहिये इसमें कांग्रेस की भूमिका निन्दनीय है।