
RBI ने बैंको को ब्याज उपलब्ध कराने से इन्कार कर दिया है। बैंक भी इस अमान्य मुद्रा को कहीं Invest नहीं कर सकते। इसलिए उनका income source block हो चुका है। बैंकों में रखी अमान्य मुद्रा जब तक मान्य मुद्रा में तब्दील ना हो जाए तब तक यह राशि कागज का टुकड़ा मात्र है। वहीं मान्य मुद्रा की आपूर्ति की रफ्तार इतनी धीरे है कि इससे खाता धारकों को ही पैसा नहीं दिया जा रहा है। सब कुछ सामान्य स्थिति में आने पर कम से कम अट्ठारह महीने लग सकते हैं तब तक बैंकों और सरकार को लगभग चार से पांच लाख करोड़ की हानि हो चुकी होगी। जबकि इस नोटबंदी से आर्थिक विशेषज्ञों को कोई फायदा नहीं नजर आने वाला। सरकार बेहद दुविधा में फंस चुकी है। वो ना बैंकों को होने वाले नुकसान से उभार पाएगी ना ही वो आम आदमी को भविष्य में कोई रियायत दे पाएगी।।
डाॅ विभूति भूषण शर्मा।