बाडमेर 02.01.2017
गुलेच्छा ग्राउण्ड में आनन्द उत्साह पूर्वक चल रही देवी भागवत कथा के छठे दिन लक्ष्मणदास महाराज ने कहा संसार में जो नजर आता है व असत्य है प्राणी उसी को सत्य मानता है और जो हमारी दृष्टि से नजर नहीं आता है वो ही सत्य है। जिस प्रकार हवा का कोई रंग या रूप नहीं होता वो नजर भी नहीं आती पर उसके स्पर्ष से ही पता चलता है इसी संसार को चलाने वाली एक आदि शक्ति है। जो समस्त संसार को चलाती है। वही उत्पति, पालन व संहार करती है। वो इन कार्यो को अलग-अलग जैसे ब्रहम विष्णु, महेष को सोप रखे है। ये त्रिवेद इसी शक्ति के द्वारा इनका संचालन करते है। हम उसी की संता को भूल बैठे है। और हमें जग में जो नजर आता है उसे सत्य मान बैठे है। हम संसारी सुख, वैभव, व उसकी चकाचोंध में खो चुके है। इस चकाचांेध को गुरू वैद शास्त्रों के द्वारा समझ कर हमें चेताते है। देवी भागवत के पावन प्रसंग में महिषासुर की पावन कथा कही। असुर उनकी प्रवति का नाम है। हमें जीवन में आसुरी प्रवति नहीं रखनी है। क्योंकि इसका विनाष निष्चित है। ये असुर हजारों वर्ष तपक रने पर भी अपने कर्म के कारण व गर्भ के कारण आखिर काल के ग्रास बने। कथा प्रांगण में भजन गायक कमल मुंदड़ा व सवाई के देवी वंदना से श्रोता झूम-झूम नाचने लगे। तबला पर चंचल पंवार, आर्गन पर हरीष द्वार का ओवटोपेड पर हरीष चावड़ा, बैंजो पर अमृतराम ने संगत की आज महिषासुर के वध की सुंदर झांकी दर्षाई गई। प्रसादी व आरती का लाभ
दुर्गाषंकर शर्मा
कथा आयोजक