फिर

उर्वशी
उर्वशी
आज फिर तुमने
वही चिर परिचित
प्रश्न
उछाल दिया है
मेरी तरफ,
मुझसे कितना प्रेम करती हो?
प्रश्न रखने का तुम्हारा
सबसे रोचक पक्ष है,
तुम्हारी निगाहों का
आश्वस्त होना ,
मेरे संभावित प्रत्युत्तर पर
की वो सदैव तुम्हारी
अपेक्षाओं के अनुरूप होगा।
तुम पुरूष हो,
तुम्हें प्रश्न रखने का
निर्बाध अधिकार है
जो मेरी दृष्टि में
मात्र
एक
उन्माद है ।
उर्वशी

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