
नई फसल के आ जाने से होली का पर्व जनसाधारण और विशेष रूप से किसानों के चहरे पर खुशी और उल्लास लाती है | होली पर्व पर रंग-गुलाल-अबीर से खेलने का भी अपना महत्व है जो पारस्परिक सदभाव को बड़ा कर भाई चारें को पनपाता है । वास्तविकता में होली के विभिन्न रंगों की बौछार हमारे मन में एक सुखद अनुभूति उत्पन्न करती है|
निसंदेह झूठ- फरेफ़, ईर्ष्या, लालच और मदान्धता का दानव आज भी हमारे वह आपके अंतस्थल में जिंदा है | इन सभी बुराईयों को हमेशां के लिए नष्ट करने के लिए सर्वप्रथम हमें खुद सच्चाई, सोहार्द, स्नेह के सन्मार्ग पर चल कर अपने बच्चों तथा युवाओं के सामने एक आदर्श प्रस्तुत करना होगा तथा अपने बच्चों में अच्छी शिक्षा, अच्छे संस्कारों को प्रतिस्थापित करना होगा |
तो क्या हम और आप अपने अंतर्मन और सच्चे दिल से तैयार हैं इस होलिका दहन पर अपनी बुराईयों को जला डालने का संकल्प लेने के लिए ? यह सही है कि ऐसा हम-आप ऐसा एक दिन में नहीं कर सकते हैं, परन्तु ऐसे पवित्र संकल्प को धारण करना भी महत्वपूर्ण होगा, हो सकता है हम अपने लक्ष्य की प्राप्ति में शत-प्रतिशत सफल नहीं हो पाएं और हमें शीघ्र सफलता भी नहीं मिले किन्तु हम सभी को सतत प्रयास तो करना ही होगा |
प्रस्तुतिकरण—-डा. जे. के.गर्ग